सर्वहारा के नायक यादवचन्द्र की स्मृति में समारोह का आयोजन

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सर्वहारा के नायक यादवचन्द्र की स्मृति में समारोह का आयोजन

Phuldev Patel

मुज़फ़्फ़रपुर। (19 फरवरी) को विकल्प के संस्थापक, सर्वहारा वर्ग के हक की लड़ाई लड़ने वाले कॉम. यादवचन्द्र की स्मृति में समारोह का आयोजन स्थानीय चुनाभट्टी रोड, यादवचन्द्र नगर स्थित मोर्चा कार्यालय में मनाया गया । कार्यक्रम की शुरुआत प्रो. कृष्णनन्दन सिंह द्वारा माल्यार्पण व उपस्थित साथियों द्वारा पुष्पांजलि अर्पित कर की गई. कार्यक्रम की शुरुआत में "विकल्प" बिहार के महासचिव साथी बैजू कुमार द्वारा आलेख प्रस्तुत किया गया, जिसमें उनके जीवन संघर्ष, रचनाधर्मिता और देश के नागरिकों के बेहतर जीवन के सपने को रेखांकित किया।  

सर्वहारा के नायक यादवचन्द्र की स्मृति में समारोह का आयोजन

मुख्य वक्ता साथी कृष्णनंदन सिंह ने कहा कि साथी यादवचन्द्र ने हमेशा सर्वहारा वर्ग का नेतृत्व किया। उन्होंने  अपनी कविता और व्यंग्य रचनाओं के माध्यम से जनता की जनवादी क्रांति का मार्ग प्रशस्त किया। उनकी कलम हमेशा सरकार के जनविरोधी नीतियों के विरोध में उठा जिसके फलस्वरूप इन्हें कइयों बार जेल भी जानि पड़ी।  लेकिन फिर भी कलम ने दम धरने के बजाय कारावास में ही "परम्परा और विद्रोह" काव्य पुस्तक की रचना कर डाली।  

सर्वहारा के नायक यादवचन्द्र की स्मृति में समारोह का आयोजन

वहीं प्रोफेसर मनोज ने अपने संबोधन में कहा कि यादवचंद्र का व्यक्तित्व मशाल की रोशनी की तरह है जो पुरानी व्यवस्था बदलकर नई व्यवस्था स्थापित करने की प्रेरणा प्रदान करती है। उसके बाद प्रोफेसर कुमार विरल ने यादवचंद्र को याद करते हुए उनके साथ बिताए पल को अपने जीवन का उत्कृष्ट पल बताया और कहा कि यादवचंद्र जैसा व्यक्तित्व आज देश समाज के लिए बहुत जरूरी है। दूसरे सत्र में कवि गोष्ठी की शुरुआत साथी रूपा की कविता "एक दिन का त्यौहार तो मना लोगे सारी दुखों को भुलाकर" से हुई। 

काव्य गोष्ठी को प्रवाह प्रदान करते हुए उमेश राज ने अपने गजल "हर घर को रोशन, ऐसा कोई चराग जलाया जाए" सुनाया। वहीं साथी विभाकर विमल ने भूख, बेरोजगारी और महंगाई से परेशान व्यक्ति की पीड़ा को अपनी कविता "कई दिनों से नहीं लिख पा रहा कोई कविता" से व्यक्त किया। हिंदी काव्य धारा के बीच सत्येंद्र कुमार सत्येन ने भोजपुरी कविता सुनाकर श्रोताओं की वाह-वाही लूटी। 

युवा कवि यशपाल राणा ने समसामयिक कविता प्रस्तुतकर श्रोताओं को सोचने पर विवश कर दिया। वही हिंदी और भोजपुरी के प्रसिद्ध कवि, गीतकार डॉ. कुमार विरल ने "आग लगाकर देशवा में हाथ सेकल जाला, बचावा भैया देशवा के सीधे लूटल जाला" सुनाकर देश की वर्तमान व्यवस्था पर करारा चोट किया। इसके अलावा सभा में उपस्थित तमाम साथियों में राजेश मिश्रा, अतुल कुमार, रामबाबू साह, चंद्रभूषण तिवारी, सुनील कुमार, सुनील  फेकानिया, विनय कुमार पांडे, हिमांशु कुमार, चंद्रशेखर आजाद, विनय कुमार वर्मा, अमन कुमार, राजू कुमार, नंदकिशोर तिवारी, श्यामल श्रीवास्तव, मनोज कुमार, भोला शाह, आनंद, पूजा, रूपा, पुष्पांजलि, निशा, अंशु, अंकुश,आदित्य आदि उपस्थित थे। धन्यवाद ज्ञापन बिहार राज्य जनवादी सांस्कृतिक मोर्चा 'विकल्प' के राज्य कमिटी सदस्य साथी अरुण कुमार वर्मा व अध्यक्षता डॉ. कुमार विरल ने की ।

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