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कोरोना कल में योग से भगाए रोग

Amritanj Indiwar

स्वस्थ तन में स्वस्थ मन का निवास होता है। प्राचीन समय से दीर्घायु, सेहतमंद एवं अवसाद मुक्त रहने के लिए आहार, विहार, योग, संयम आदि को प्राथमिकता दी जाती रही है। शरीर हाड़-मांस और हड्डियों से निर्मित है। जिसमें लाखों कोशिकाएं टूटती और बनती रहती है। हम सभी जानते हैं कि कफ, पित्त और वायु के असंतुलन के कारण ही व्याधिग्रस्त हो जाते हैं। ऐसे में प्राणायाम (योग ) शरीर में नई ऊर्जा का संचार करता है। कोशिकाओं का नवनिर्माण करता है। दिलोंदिमाग को तरोताज़ा रखता है। प्राण +आयाम से 'प्राणायाम' शब्द बना है। जिसका शब्दिक अर्थ है-श्वास  वायु का विस्तार करना। यानि साकारात्मक ऊर्जा को प्रवाहित करना। योग डीके अर्थ  जोड़ना होता है। 

वैश्विक महामारी कोरोना के कारण पूरी दुनिया तबाह है। कोरोना के नाम से ही लोगों में जीने की आस कमजोर पड़ती जा रही है। परिणामतः अवसाद, उदासी, तनाव, निराशा आदि शनैः शैनः मनुष्य को कमजोर कर रहा है। खासकर श्वसन-तंत्र में संक्रमण तेजी से फैल रहा है। दूसरी तरफ अनियमित दिनचर्या की वजह से कम उम्र में ही व्यक्ति हड्डियों के दर्द-ऐंठन, सर्वाइकल, अस्थमा, श्वांस रोग, हृदय रोग, रक्तचाप, स्नायु विकार, मधुमेह, मानसिक रोग आदि से ग्रस्त हो जा रहे हैं ।
 

कैसे करें योग: प्राणायाम करने का उपयुक्त समय है सुबह अर्थात् ब्रह्ममुहूर्त। नित्य-क्रिया से निवृत्त होने के बाद खुला वातावरण में आसन लगाकर बैठ जाएं। शुरू के दिनों में जितना कम हो सके  योगासन करें। धीरे-धीरे एक-एक योग शरीर की स्थिति के अनुसार अभ्यास में लाएं। जिससे अप गुडफिल करेंगे और स्वास्थ्य के लिए भी फायदेमंद होगा।
आरंभ में कौन-सा करें प्राणायाम: 

                1 कपालभाति
                2 अनुलोम-विलोम (नाड़ी शोधन)
                3 उज्जयी  
                4 भ्रामरी
                5 भस्त्रिका
                6 शीतली

इन प्राणायामों को प्रशिक्षित व्यक्ति से पहले सीखें। तत्पश्चात् नियमित करना आरंभ करें। जिससे आपका शरीर स्वस्थ और सानंद रहेगा। साथ ही आप दीर्घायु भी होंगे व ऊर्जावान बने रहेंगे। गंभीर रोगग्रस्त लोगों को पहले योगासन की बारीकियों की बुनियादी जानकारी प्राप्त कर लेना चाहिए। ऐसा नहीं करने से नुकसान का सामना भी करना पड़ सकता है। योग भी औषधि की तरह ही है। करने से पहले अच्छी तरह से प्रशिक्षित हो जाना चाहिए।
कोरोना काल के लिए उपयुक्त: सूर्य नमस्कार, तिर्यक ताड़ासन, ताड़ासन, कोटि चक्रासन, वायु निष्कासन जैसे योग करके स्वस्थ रह सकते हैं। योगगुरु बाबा रामदेव के अनुसार योगासन करने से श्वेत रक्त कणिकाएं बढ़ती है। ब्लड संचरण की गति संतुलित रहती है। परिणामतः रोग प्रतिरोधी क्षमता में इजाफा होता है। इसलिए प्रतिदिन योगासन के साथ-साथ पौष्टिक व संतुलित शाकाहार लेना श्रेयस्कर माना जाता है।
 

प्रशिक्षक  की देखरेख में शुरू करें योग: पुरानी कहावत है-अधूरी जानकारी खतरे की निशानी अर्थात् प्रत्येक व्यक्ति का शरीर की प्रकृति और प्रतिरोधी क्षमता अलग-अलग होती है। इसलिए योगासन करने से पहले यह सुनिश्चित करना कि कोई बीमारी तो नहीं है। यदि कोई भी बीमारी है, तो उसका योग अलग-अलग हो सकता है। योग से रोग जरूर भगाया जा सकता है। पर, इसके लिए योग्य प्रशिक्षक और मार्गदर्शक की जरूरत पड़ती है। अतएव टीवी, रेडियो, सोशल मीडिया के वीडियो देखकर करने के बजाय किसी प्रशिक्षक के निर्देशन में अभ्यास करना हितकर है।
 

योग के फायदे: कोरोना काल में श्वसन-तंत्र की मजबूती के लिए पांच योगासन करना काफी लाभदायक है। कपालभाति, भास्त्रिका, अनुलोम-विलोम, भ्रामरी एवं उदगीथ। अंग-प्रत्यंग में नई ऊर्जा का संचार करता है। कोषिकाओं के निर्माण में सहायक होता है। शरीर से टाॅक्सिन (दूषित व जहरीले पदार्थ) को निकालकर सेहतमंद बनाता है। योग के जरिए रोग से बचाव के अलावा रोग से छुटकारा भी प्राप्त करते हैं। योग अमृत के समान है।
 

कपालभाति: शरीर के सभी अवयवों को स्वस्थ रखने में सक्षम
भास्त्रिका: पाचन, दिल, श्वसन, व दिमाग को सुरक्षित व स्वस्थ रखता है। कफ व पित्त को संतुलित रखता है।
अनुलोम-विलोम:     दिल और स्नायु को स्वस्थ रखता है।
भ्रामरी: तनाव और स्नायु को दुरुस्त रखता है।
उदगीथः मस्तिष्क संबंधि रोग-माइग्रेन, अवसाद आदि से रक्षा करता है।
 

दरअसल, पूरी दुुनिया कोरोना की वजह से आर्थिक संकट का जबर्दश्त सामना कर रही है। स्वास्थ्य, शिक्षा , रोजगार, उद्योग-धंधे सभी ठप पड़े हैं। वजह साफ है कि महामारी और अस्वस्थता के कारण ऐसा संकट आया है। क्यों नहीं हम सभी अपने परिवार की सेहत का ध्यान रखते हुए योगासान का अभ्यास करके शरीर और पैसे को बचाएं। Health is Wealth- स्वास्थ्य ही धन है। हम सभी शपथ लें कि योग के जरिए परिवार, समाज, देश , दुनिया को स्वस्थ और सानंद रखेंगे। योग चार माने जाते हैं-राजयोग, कर्मयोग, भक्तियोग और ज्ञानयोग इसका प्रतिपालन करने के लिए यथेष्ट प्रयास करना चाहिए, ताकि कोई कमी नहीं रह जाए। आइए, आलस्य को त्याग के तन और मन को स्वस्थ बनाएं।   

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