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मूंग की खेती से रूका पलायन

 विकास मेश्राम

वागधारा, राजस्थान 

कोरोना महामारी के कारण पिछले साल से ही पूरी दुनिया में एक साथ कई संकट पैदा हुए हैं । सबसे ज़्यादा रोजी-रोजगार प्रभावित किया है। किसानी, मजदूरी, उद्योग, धंधे आदि बिलकुल चौपट गए हैं। ऐसे में छोटे जोत  के किसानों  की माली हालत बदतर हो गई  है। इसके बावज़ूद किसानों  ने हिम्मत नहीं हारी है। अन्य राज्यों  में पलायन  करने  के बजाय अपने बलबूते खेती में नई  तकनीक और उन्नत किस्म के बीजों  से खेती करके अपनी आवश्यकताओं को पूरी कर रहे हैं । ऐसे ही किसान हैं संजू। जिन्होंने रोजगार के लिए दूसरे राज्य में न जाने का निश्चय किया।आइये जानते हैं, संजू की जुबानी पलायन  से मुक्ति की कहानी -

राजस्थान के बासवाडा जिले अंतर्गत आनंदपुरी ब्लॉक के सुद्राव गांव  के  26 वर्षीय संजू चमना  गरासिया  ने  5 बीघे में मूंग की  खेती करके माली हालत सुधार रहे हैं। संजू कहते हैं  कि वर्षा आधारित खेती  करता हूं। मेरे पास  2 बैल ,3 गाय,2 बकरी है |  बचपन से ही माँ और अपने पिताजी को खेती  से ही किसानों की कई तरह की समस्याओं को देखा और अनुभव किया था, खासकर रबी की फसल की खेती के दौरान जब पानी की कमी होती है। इसलिए, जब उन्होंने 'वागधाराआयोजित 'समेकित सच्ची खेती  प्रशिक्षण कार्यक्रम' में सहभागी  होने  का अवसर मिला। इस प्रशिक्षण के बारे में  वागधारा के सहजकर्ता मानसिंग निनामा ने बताया और जैविक खेती करने की मन में ठान लिया और खेती में पूरा  समय लगाने का फैसला किया

प्रशिक्षण में  बीज सुधार, मिट्टी पोषक तत्व प्रबंधन, रोग और कीट प्रबंधन और कम्पोस्ट एवं जीवामृत तैयार करने की विधि बताई गई और फिर मूंग की खेती के बारे में जानकारी से अवगत किया | प्रशिक्षण में बताया कि मूंग प्रोटीन, विटामिन और खनिजों की उच्च सामग्री के कारण देश की पोषण-सुरक्षा में महत्वपूर्ण योगदान देती है। मूंग की खेती कितनी लाभकारी हो सकती है, कितने दिन में हो सकती है और इसके फायदे कौन -से हैं।

वागधारा की  पहल से और राजस्थान कृषि विभाग के  मध्यम से 5 किलो मूंग। मिला।  संजू ने 1.5  बीघे  में बुआई की। इस  फसल में 2500 /- रुपए  के ख़र्च आए | परिणामतः 1.5 बीघे  में 3.5  क्विंटल  का उत्पादन हुआ।  इसमें  300 किलो  8000 /- रूपये के भाव से मण्डी में बेचकर 24000/-  रूपये प्राप्त किए। खेती की उपज  के खर्चें निकलने के बाद 21500/- रुपए मुनाफ़ा  हुआ।  

मूंग की फसल फायदेमंद है। केवल 60 दिनों में तैयार  जाती है। संजू बताते हैं  कि इस फसल के पैसे से मैंने कुआँ  की गहराई कराई। मेरी आजीविका में सुधार हुआ पहले गुजरात में रोजगार के लिए जाता था | अब कुएं के गहरीकरण से मै सालभर खेती के काम में व्यस्त रहता हूं।

मूंग से मेरे पशु के लिए चारा उपलब्ध हो जाता है। भात के साथ मूंग की दाल का भी  काम चल जाता है। जिससे संजू के परिवार का भरण-पोषण हो जाता है।  साथ ही फाउंडेशन सीड्स के रूप में भंडारण करने से अगले साल बीज की बुवाई बिना पैसे की हो जाएगी।  

 

 

 

 

 

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1 टिप्पणियाँ

  1. Aaj ke samay me ganvo se ho raha palayan ek vikat samsya hai. Vaagdhara Sanstha dwara is or kiye ja rahe prayas sarahniya hai...

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