ज्वलंत मुद्दे

6/recent/ticker-posts

हल्दी की खेती से आई बालेश्वर के जीवन में खुशहाली

खेती-बाड़ी  के जरिए युवा किसान बालेश्वर ने अपने घर . गृहस्थी की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ करने के लिए हल्दी की खेती शुरू की।  आज  हल्दी के उत्पादन से साल में हजारों  रुपए  कमाते हैं। धीरे.धीरे संस्था के मार्गदर्शन में हल्दी पाउडर की पैकिंग कर बाजार में खुद का ब्रांड खड़ा  किया है।  आइए,   जानते हैं  किसान की जुबानी:



विकास मेश्राम

राजस्थान  

किसानों को  हल्दी की खेती करने से बहुत ही कम लागत में और कम खेती लायक जमीन में अच्छा मुनाफा किसान भाई प्राप्त कर सकते है।  हल्दी का उपयोग हजारों वर्षों से औषधि उपचार के लिए होता आ रहा है।  इसमें कुरकमीन तत्व होता है जिसके कारण हल्दी का रंग पीला  होता है द्य इसका उपयोग अल्सर ए पेट सम्बन्धी तकलीफे बीमारियों के उपचार के  लिए किया जाता है।  इसके अलावा घर में किचेन से लेकर शुभ मुहूर्त में हल्दी की उपियोगिता और बढ़ जाती है। इसकी मांग पूरे साल रहती हैए इसका उत्पादन करके किसान अपनी आजीविका में वृद्धि कर सकते  हैं।  

राजस्थान के धनेवा बड़ा ;तहण्. आनन्दपुरी द्धए बांसवाडा जिले के किसान बालेश्वर नाथूजी ताबियार आदिवासी जनजातीय क्षेत्र के ये किसान हैं। उन्होंने 5 बीघा सिंचाईयुक्त जमीन पर रबी.खरीफ़ मौसम में विविध फसल की उपज करते है ए जैसे की खरीफ़ में मुख्य फसल मक्का ए उडद ए तिल ए और पाथरिया चावल एवं रबी में मुख्य फसल चनाए गेहूं होती है द्य उसके पास चार भैस ए दो बैल और पांच बकरियां है द्य

वाग्धारा ने खेती  लिए प्रेरित किया

बालेश्वर जी बताते है कि ये पारम्परिक फसल के अलावा अपने खेत में प्रयोगात्मक खेती करने का इरादा मेरे जेहन में बहुत दिनों से था।  किन्तु उचित मार्गदर्शन के अभाव से कर नहीं पा रहा था।  जब वाग़धारा के सह्जकर्ता मानसिंह निनामा ने संस्था के टीम लीडर रोहित स्मित और  कार्यक्रम अधिकारी गोपाल सुथार के संपर्क में आया तब उन्होंने मुझे वाग़धारा के सच्ची खेती के बारे में बताया।  उसमें मुझे जैविक खेती  क्या हैघ् और कैसे फायदेमंद कैसे हो सकती है घ् आज के दौर में जैविक खेती कितनी महत्वपूर्ण और आवश्यक है घ् इसके बारे में बताकर मुझे खेती करने के लिए प्रेरित किया। 

 हल्दी की पैकिंग कर बढ़ा रहे आमदनी

साथ ही सफल किसान  बालेश्वर बताते हैं कि हल्दी की अच्छी उपज के लिए वे अपने खेत में गोबर खाद का उपयोग करते हैं ! वहीं जरूरत अनुसार दसपरनी  की छिड़काव करते रहते हैं ! साथ ही किसान ने अपने खेत में हल्दी के साथ मक्का  और गेहूं की भी खेती करते हैंए जिससे उन्हें हल्दी की खेती से अलग मुनाफा भी मिला  है ।  ज्यादा मुनाफा कमाने के लिए उन्होंने अब हल्दी पाउडर के लिए मिनी हल्दी मशीन भी लगा ली है । इससे पैकिंग करके वे हल्दी बाजारों में अच्छे  दामों में बेचते हैं। जिससे उन्हें प्रति किलो 400 रुपये मिलते हैं ।इससे उनकी आमदानी में बढ़ोतरी हो रही है।  साथ ही उनका कहना है कि कोरोनाकाल में भी अच्छी मांग के कारण उनकी हल्दी  आसानी से बिक गई ।

सोशल मीडिया बना प्रचार  माध्यम

इसी के तहत वाग़धारा ने मुझे मेरे खेत में हल्दी की पैदावार करने के लिए 10 किलो हल्दी का बीज दिया । जिसे मैंने आधा बीघा जमीन में रोपण कर अपने पशुधन के अपशिष्ट से 1000 किलो गोबर की खाद डाली। इसके लिए मुझे तकनीकी मार्गदर्शन वाग़धारा के कृषि विशेषज्ञ पीण्एलण् पटेल जी ने दिया।  मैंने हल्दी बुवाई जुलाई माह के पहले सप्ताह में की और उसकी कटाई मई माह में की ।मैंने आधा बीघा जमीन में 10 किलो हल्दी के बीज से 5 क्विंटल हल्दी का उत्पादन किया ।  4 क्विंटल हल्दी 100 रूपये प्रति किलो के भाव से बेचकर 40000 रुपए  तक की आमदनी की । 70 किलो हल्दी का पाउडर बनाकर 400 किलो के भाव से बेचा । उससे मुझे 28000 रुपए की आमदनी हुई और  30 किलो अपने घर में और फसल के लिए रखी। हल्दी के बिक्री हेतु मुझे कहीं जाना नहीं पड़ा मैंने सोशल मीडिया का सही उपयोग करके व्हाट्स एप्प ग्रुप और फेसबुक से प्रचार के माध्यम से पूरी हल्दी की बिक्री की। इसी तरह मैंने कुल 68000 रुपए की आमदनी कर मुनाफा कमाया और मुझे हल्दी के लिए बाजार  पर भी निर्भर भी नहीं रहना पड़ा । मुझे 2009 में सागवान के 20 पौधे दिए थे जो अभी पेड़ हो गये हैं । जिसका वर्तमान में कीमत 40000  रुपए है । 

परियोजना के तहत 2009 में  वागधारा ने दिए 20 सागवान के पेड़

वाग़धारा ने मेरी आजीविका ही नहीं अपितु मेरे परिवार के स्वास्थ्य हेतु भी पोषण वाटिका में मुझे सब्जी किट उपलब्ध करवाया।  भिण्डीए चावलाए लौकीए तुरईए टमाटरए बेंगनए ग्वारफलीए मैथीए पालक ए मिर्ची आदि अनेक प्रकार की सब्जियों के उत्पादन करके भी मेरी परिवार का पोषण स्तर बढाया द्य मुझे जैविक खेती के प्रति प्रेरित करकर मेरी आजीविका बढाने में मदद की। 


 


 


 

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ