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बाल पंचायत मोरवानिया के बच्चों ने अपने अधिकार की लड़ाई खुद लड़ी

👉स्कूल में खेल मैदान नहीं था, बाल पंचायत ने पंच के सामने रखी समस्या, 

👉आखिर नरेगा के तहत हुआ काम

शारीरिक और मानसिक विकास  के लिए केवल पौष्टिक भोजन ही नहीं अपितु खेलकूद व योग बेहद जरुरी है। जब बात आती है स्कूली जीवन या बचपन की, तो निःसंदेह खेल बच्चों के लिए अतिप्रिय लगता है। आज ऐसे स्कूल की बात की जा रही है, जहां  वर्षों से खेल का मैदान नहीं था।  बच्चों  के आंदोलन और अथक प्रयास को रेखांकित कर रहे हैं 

विकास मेश्राम :  

समाज में परम्परा रही है कि अपने अधिकारों के लिए खुद ही लड़ना पड़ता है।  राजस्थान के बांसवाड़ा अंतर्गत मोरवानिया पंचायत के आदिवासी समुदाय के बच्चों की पंचायत अपने हितों और अधिकारों की  बात करने लगी है। मोरवानिया की इस बाल पंचायत ने अक्टूम्बर 2020 में यहाँ राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में खेल मैदान नहीं होने की समस्या को प्रमुखता से उठाया। बच्चों का कहना था कि स्कूल  है लेकिन खेल मैदान नहीं है। ऐसे में बच्चे खेल गतिविधियाँ कहाँ पर करें।  मैदान के अन्दर चारों तरफ झाड़ियां और उबड़-खाबड़ जमीन है।  खेल मैदान की इस मांग को बाल पंचायत में समुदाय के सामने रखा और उन्हें मनाया।  बच्चों ने अपने हितों को लेकर ग्राम विकास एवं बाल अधिकार समिति मोरवानिया के साथ बात रखी।  जिसके अंतर्गत उन्होंने बताया कि राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय मोरवानिया में उनके लिए खेलने के मैदान को दुरुस्त किया जाए।  उन्होंने अपनी मांग को लेकर पहले बाल पंचायत की बैठक में चर्चा की एवं इसी मुद्दे को उन्होंने ग्राम विकास एवं बाल अधिकार समिति के साथ साझा किया। समिति ने ग्राम पंचायत सरपंच अन्तर देवी को समस्या से अवगत कराया।


 

नवम्बर 2020 में पंचायत की बैठक में प्रस्ताव लिया

बैठक में सभी वार्ड पांच और समिति  सदस्य ने इस समस्या के निराकरण के लिए जोर दिया।  जिसे सरपंच के द्वारा गंभीरता से लिया गया और इस समस्या का निराकरण करने के लिए आश्वासन दिया।  नवम्बर 2020 में पंचायत की बैठक में प्रस्ताव लिया गया कि मैदान को नरेगा के अंतर्गत समतलीकरण किया जाएगा। जिसके लिए सभी सदस्यों ने इस प्रस्ताव को स्वीकार किया। दिसम्बर 2020 में नरेगा के तहत मैदान का समतलीकरण कर दिया गया और यहाँ से सारे झड- झंकार हटा दिए गये। उसके पश्चात बाल पंचायत के द्वारा इस खेल के मैदान का अवलोकन भी किया गया।  बाल पंचायत ने खेल मैदान को लेकर संतुष्टि जाहिर की और पंचायत को धन्यवाद दिया | हालांकि दूसरे लॉकडाउन के बाद से बच्चे यहाँ पर नहीं खेल पा रहे हैं।

बाल पंचायत के योगदान की हो रही सराहना

बच्चों के विकास और सहभागिता के लिए हमें ही सोचना होगा | उनकी समस्याओं और जिज्ञासाओं को हमारे द्वारा जाने-अनजाने में अनदेखा किया जाता है | जो कहीं न कहीं उनके विकास को बाधक करता है | इसलिए बच्चों के लिए बच्चों का यह प्रयास और योगदान सराहनीय है |

 बाल कार्यक्रम अधिकारी मुकेश सिंघल कहते हैं  कि जब बच्चे अपनी बातों को बड़ों के सामने रखते है और उन्हें एक जिद के समान पूरा करने का आह्वान पंचायत से किया जाता है, तब विकास कार्य के लिए आगे आना ही पड़ता है | मोरवानिया की यह बाल पंचायत जिले भर  में आदर्श उदहारण है |

सरपंच अन्तर देवी कहती हैं  कि यह आधुनिक भारत के बच्चे है जो अपनी बातों और अपनी समस्याओं को लेकर समुदाय का ध्यान खींचने और उनके समाधान के लिए समुदाय को आगे लायेंगे जिससे हमारा गाँव बाल मित्र गाँव की ओर बढेगा।


 

 

 

 

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