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बरसात में मलेरिया से बचाव का रखें ध्यान


✔साफ़-सफ़ाई के प्रति रहें सतर्क, मलेरिया होने का ख़तरा होगा कम
✔सही प्रबंधन के आभाव में मलेरिया हो सकता है जानलेवा
✔विश्व में मलेरिया से होने वाली मृत्यु में 67% बच्चों का प्रतिशत- विश्व स्वास्थ्य संगठन 

पटना/ 21 जून : पूरे राज्य सहित जिले में भी बारिश के मौसम की शुरुआत हो चुकी है. जगह- जगह बारिश के कारण जलजमाव की स्थिति देखी जा रही है. जमे पानी के कारण जलजनित रोगों के बढ़ने की संभावना भी बढ़ती जा रही है. जमा हुआ पानी मच्छर के पनपने का लिए अनुकूल होता है. मच्छर के काटने से कई रोग जैसे मलेरिया, डेंगू, कालाजार एवं चिकनगुनिया जैसे रोगों के प्रसार की संभावना प्रबल रहती है.  जिसमें  मलेरिया नवजात शिशुओं, गर्भवती महिलाओं एवं 5 वर्ष से कम आयु वाले बच्चों के लिए समुचित प्रबंधन के आभाव में जानलेवा साबित हो सकता है.  

विश्व में मलेरिया से होने वाली मृत्यु में 67% बच्चों का प्रतिशत- विश्व स्वास्थ्य संगठन: 

विश्व स्वास्थ्य संगठन की एक रिपोर्ट के अनुसार विश्व में मलेरिया से होने वाली कुल मौतों में 67% बच्चे ही शामिल रहते हैं. बच्चों को मलेरिया के प्रकोप से बचाना स्वास्थ्य संस्थानों के लिए एक चुनौती साबित हो रही है. जारी रिपोर्ट में बताया गया है कि मलेरिया मादा एनोफिलीस मच्छर के काटने से होता है और इसके लक्षण 10 से 15 दिनों के बाद ही दिखाई पड़ते हैं.  

बचाव का सबसे बेहतर उपाय है स्वच्छता और सावधानी :

सिविल सर्जन डॉ. विभा सिंह बताती हैं मलेरिया मच्छर जनित रोग है, जो मादा एनोफिलीस मच्छर के काटने से होता है। वयस्कों में मलेरिया का उचित प्रबंधन न हो तो इससे मल्टी ऑर्गन फेलियर तक हो सकता है. मादा एनोफिलीस मच्छर पनपने का सबसे बड़ा कारण गंदगी और जलजमाव है। इसलिए अपने आस-पास साफ सफाई रखें, खाली बर्तन, डब्बे, गमले, घर के आस-पास की नालियाँ समय-समय पर साफ करें और गंदा पानी न जमने दें। शौचालय एवं उसके आसपास की जगह, किचन, बेडरूम अंधकार मुक्त और हवादार बनाएँ तथा जमे हुये पानी पर कीटनाशक का प्रयोगकर मच्छरों को नष्ट कर दें। वाटरकूलर या नल के पास पानी जमा नहीं होने दें। सोते समय मच्छरदानी का उपयोग जरुर करें और हाँथ- पैर को ढंकने वाले कपड़े इस्तेमाल करें. सही जानकारी के अभाव में मलेरिया समुदाय के लिए चिंता का विषय बना हुआ है।किन्तु यदि साफ-सफाई और सुरक्षा के उपाय किए जाएँ तथा इसके लक्षणों को सही से समझ कर ससमय इलाज किया जाय तो इसे हराना आसान है। 

मलेरिया के लक्षण :

सिविल सर्जन ने बताया यदि किसी को सामान्य से अधिक तेज बुखार हो, तेज सिरदर्द, आंखों के पीछे दर्द, मांसपेशियों में सूजन और तेज दर्द, हड्डियों में दर्द, उल्टी और जी मचलाये, बच्चों में एनीमिया के लक्षण नजर आयें तो अविलंब चिकित्सीय सलाह लें। जांच से मरीज को मलेरिया है या नहीं  यह  आसानी से पता चल पाएगा और चिकित्सक उसके अनुसार इलाज शुरू कर पाएंगे। हालांकि तेज बुखार कोरोना संक्रमण का लक्षण भी हो सकते हैं। इसलिए लक्षण दिखने पर सर्वप्रथम जाँच कराएं।

मलेरिया से बचाव :

आस-पास साफ़-सफाई रखें एवं घर में पानी जमा होने ना दें 

सोते समय मच्छरदानी का उपयोग करें

बच्चों को फुल आस्तीन की कमीज एवं फुलपैंट पहनाए

वाटर कूलर या नल के पास पानी जमा नहीं होने दें 

जमे हुए पानी पर मिट्टी का तेल डालें 

मच्छर भगाने वाली दवा/क्रीम का प्रयोग दिन में भी करें

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