- मोतीपुर के मोरसंडी का आठ वर्षीय दीपक चमकी से प्रभावित
- 4 दिन बाद स्थिति में आ रहा सुधार
A Rahman
मुजफ्फरपुर। 9 जून
‘‘हल्का सा बुखार रहलक, पता न कैसे ई काल हमर लयका के पकड़ लेलक....कहते हुए चमकी से प्रभावित 8 वर्षीय दीपक की दादी सर पकड़ लेती है। वह आगे कहती हैं एक दिन में तीन बार दीपक को चमकी आया। एक सुबह चार बजे दिन में,साढ़े बारह बजे और एक जब वह मोतीपुर में ईलाजरत था। दादी फिर कहती हैं उसके शरीर की ऐंठन देखकर मेरे रोंगटे खड़े हो जाते थे। दरअसल मोतीपुर प्रखंड के 8 वर्षिय दीपक एक दिन में तीन बार चमकी से प्रभावित हुआ। अगल -बगल वालों ने लक्षण देख कर ही पहचान लिया। आशा को तुरंत फोन किया गया। आशा ने तत्परता दिखाते हुए मोतीपुर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र से एम्बुलेंस मंगाया। पीएचसी में प्राथमिक ऊपचार हुआ। हांलांकि ईलाज के दौरान भी एक बार दीपक को चमकी का दौरा आया, पर लगातार प्रोटोकॉल के तहत ईलाज होने से दीपक के स्वास्थ्य में स्थिरता आयी। बाद में बेहतर ऊपचार के लिए उसे एसकेएमसीएच रेफर कर दिया गया।
चार दिन बाद बच्चे के मुंह से फूटे स्वर
दीपक की दादी कहती हैं –‘‘मेरा बच्चा कहीं धूप में खेलने भी नहीं जाता था। शनिवार को हल्का सा बुखार आया। मैंने गांव के ही डॉक्टर से दवा लेकर उसे सुला दिया। सुबह चार बजे भी हल्का चमकी आया था, मगर फिर सुबह आठ बजे जब खिलाकर सुलाया। उसके बाद साढ़े बारह बजे उसे चमकी आया। रविवार को ही दीपक को एसकेएमसीएच रेफर किया गया था। चार दिन बाद मैंने अपने पोते के कंठ से कोई स्वर सुने हैं। मन को काफी राहत मिली है। कल से ही इसके तबियत में काफी सुधार देखने को मिल रहा है’’।
चमकी पर मिली है सीख
दीपक की दादी कहती हैं उन्हें अब सीख मिल गयी है। दीपक से छोटी उनकी पोती है। उसकी उम्र भी पांच साल है। अब वह रोज रात को बच्चों को खाने में कुछ मीठा जरुर देंगी। वहीं हल्का सा बुखार आने या चमकी जैसे लक्षण दिखते ही आशा को फोन करना नहीं भूलेंगी। झोला-छाप चिकित्सकों के चक्कर में कभी नहीं फंसने की बात भी कहती है।

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