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जैविक पोषण वाटिका से सशक्त हो रही किरपादेवी डामोर

विकास मेश्राम 

वागधारा  वि  

वागधारा संस्था  द्वारा केकेस परियोजना तहत भारत में राजस्थान राज्य के प्रतापगढ़ और बांसवाड़ा जिले के 15 गांवों में घरेलू आय को बढ़ावा देना और लगभग 400 छोटे एवम सीमांत किसान परिवारों (लगभग 2.000 व्यक्तियों) के बीच स्थायी आजीविका और खाद्य एवं पोषण की  सुरक्षा में सुधारकर सुनिचित करना ।  

2018 में वाग़धारा संस्था द्वारा गठित सक्षम महिला समूह के साथ जुड़कर यह समूह गाँव में सच्ची खेती से उत्पादन में वृद्धि करवाना सक्षम समूह द्वारा कृषि से जूडी समस्यायों को खोजना, पारम्पारिक खेती को बढ़ावा देना, कृषि से जुडी सरकारी योजनाओं को लोगों तक पहुँचाने में योगदान देना, स्थानिक संसाधनों का ज्यादा से ज्यादा उपयोग करकर आजीविका में बढ़ोतरी करना, बाजार पर निर्भरता कम करना , घर-घर में पोषण वाटिका और बहुद्देशीय पौधे लगाना यह सब उद्देश्य मुझे सक्षम समूह के साथ जुड़ने से मालुम हुए | वाग़धारा ने मुजे पपीता ,सीताफल ,लिम्बू ,जामुन ,के पौधे दिए जों हमने अपने जैविक पोषण वाटिका में लगाये | 

जैविक पोषण वाटिका से सशक्त हो रही किरपादेवी डामोर

स्वयं सहायता संरचनाओं की स्थापना, सिंचाई सुविधाओं की उपलब्धता में  वृद्धि  , मिट्टी की सुरक्षा और मिट्टी उर्वरता में सुधार, छोटे पैमाने पर पशुधन उत्पादन और पोषण उद्यान की स्थापना, साथ ही प्रशिक्षण देकर किसान सरकारी संस्थानों और अन्य हितधारकों के साथ सक्रिय और कार्यशील स्थिरता और सफलता चिरन्तरता प्रदान करना यह परियोजना  का उद्देश्य है ।  इसके साथ भोजन में संतुलित पोषण का होना जरूरी है, जिसे शरीर की आहार संबंधी आवश्यकताओं के संबंध में माना जाता है। अच्छा पोषण - नियमित शारीरिक गतिविधि के साथ पर्याप्त, संतुलित आहार - अच्छे स्वास्थ्य की आधारशिला है।

वर्तमान में बच्चों और किशोरों के लिए वैश्विक उपयोगिता की कोई आहार संबंधी सिफारिश उपलब्ध नहीं है इसलिए कुपोषण का प्रमाण बढ़ रहा है | कुपोषण एक ऐसी स्थिति है जो ऐसा आहार खाने के परिणामस्वरूप होती है जिसमें एक या अधिक पोषक तत्व या तो पर्याप्त नहीं होते हैं या बहुत अधिक होते हैं जिससे आहार स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बनता है। इसमें  कैलोरी ,  प्रोटीन , कार्बोहाइड्रेट ,  विटामिन या  खनिज  शामिल हो सकते हैं  पर्याप्त पोषक तत्वों कहा जाता है कुपोषण या अल्पपोषण जबकि बहुत ज्यादा कहा जाता है पोषण से अधिक।   

भारत जैसे विकासशील देशों में कुपोषण एक गंभीर चुनौती है। भारत में कुपोषण की स्थिति अन्य दक्षिण एशियाई देशों या उप सहारा अफ्रीका से भी अधिक खतरनाक है। सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय की ताजा रिपोर्ट चिल्ड्रन इंडिया 2012' आगे पुष्टि करती है कि पांच साल से कम उम्र के 48% बच्चे अविकसित है । यह इंगित करता है कि देश के आधे बच्चे लंबे समय से कुपोषित हैं।

इस परियोजना में संतुलित आहार की उपलब्धता और इन पर स्वास्थ्य पर विशेष लक्षान्वित किया गया है | इसमें बच्चें, गर्भवती महिलाए , धात्री महिलाए ये इस योजना के केन्द्रीय पटल पर है | बच्चों को पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराया जाएगा और उनके माता-पिता को घर पर पोषण में सुधार पर ज्ञान प्रदान किया जाएगा और स्थानीय रूप से उपलब्ध पौष्टिक खाद्य पदार्थों के व्यंजनों का प्रदर्शन किया जाएगा। 

गांवों का चयन तीव्र कुपोषण के उच्च प्रसार के आधार पर किया गया है। आंगनवाड़ी सेवाओं और एमएएम बच्चों के परिवारों के बीच शत-प्रतिशत जुड़ाव सुनिश्चित किया जाएगा। गंभीर एसएएम बच्चे इलाज के लिए एनआरसी का हवाला दे रहे हैं। सैम बच्चों के परिवारों को आने वाले वर्ष में किचन गार्डन विकसित करने की सुविधा दी जाएगी।

किरपादेवी शान्तिलाल डामोर राजस्थान के प्रतापगढ़ जिले में पीपलखूंट ब्लॉक के ठेचला गाँव में रहते है उनको 2 लडके और 1 लडकी हैं  | उनकी आय का मुख्य स्त्रौत खेती है जो पांच बीघा की जमीन है | पारम्परिक तरीके का उपयोग करके फसल करते है | इसमें खरीफ़ में मक्का, सोयाबीन और रबी में गेहू, मूंग की फसल उगाते है |

2018 में वाग़धारा संस्था द्वारा गठित सक्षम महिला समूह के साथ जुड़कर यह समूह गाँव में सच्ची खेती से उत्पादन में वृद्धि करवाना सक्षम समूह द्वारा कृषि से जूडी समस्यायों को खोजना, पारम्पारिक खेती को बढ़ावा देना, कृषि से जुडी सरकारी योजनाओं को लोगों तक पहुँचाने में योगदान देना, स्थानिक संसाधनों का ज्यादा से ज्यादा उपयोग करकर आजीविका में बढ़ोतरी करना, बाजार पर निर्भरता कम करना , घर-घर में पोषण वाटिका और बहुद्देशीय पौधे लगाना यह सब उद्देश्य मुझे सक्षम समूह के साथ जुड़ने से मालुम हुए | वाग़धारा ने मुजे पपीता ,सीताफल ,लिम्बू ,जामुन ,के पौधे दिए जों हमने अपने जैविक पोषण वाटिका में लगाये | 

इसके  तहत मैंने वाग़धारा के माध्यम से मैंने अपने खेत में मेडबंदी करवाई और मुझे संस्था ने पाईप दिए ताकि मेरी खेती सिंचाईयुक्त हो जाए | मुझे जैविक खेती के बारे में प्रशिक्षण देकर अपने घर में वर्मीकम्पोस्ट खाद तैयार करके संस्था द्वारा मुझे बीज कीट दिया था | इसे मेंने जैविक पोषण वाटिका में प्रयोग किया | बीज कीट में टमाटर, बैंगन, करेला, लौकी, तुरई, धनिया, मिर्ची, ग्वारफली आदि की पैदावार जैविक पोषण वाटिका में हुई | यह मैंने अपने घर में खाने के उपयोग में लिया और अक्टुम्बर 2018 से अबतक बाजार से कोई सब्जी नहीं खरीदी | संस्था ने मुझे सिरोही नस्ल की बकरी दी है यह बकरी ने मुझे लाभान्वित किया है मैंने इसका बकरा बेचकर 9000/- रूपये की राशी प्राप्त की |

वाग़धारा ने दो वर्ष पूर्व स्वास्थ्य शिविर आयोजित किया था ,उसमे मेरे दोनों लड़कों की जाँच करवाने पर दोनों को  कुपोषित बताये गये थे | अभी दिसम्बर 2020 में मैने दोनों लड़कों की पीपलखुंट सरकारी स्वास्थ्य केंद्र में जाँच करवाई तो दोनों कुपोषण मुक्त हो गये है |

यह सब जैविक पोषण वाटिका लगाकर साक-सब्जियों नियमित उपयोग करने से हुआ है | मै वाग़धारा संस्था का बहुत आभारी हूँ | जिसने मेरे दोनों बच्चों को कुपोषण मुक्त करवाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई |


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