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पलायन पर बेहतरीन कार्य कर रही है जनजातीय स्वराज संस्था

विकास मेश्राम

बेहतर आजीविका और बेरोज़गारी दूर करने के लिए गांव से अन्य प्रान्त में जाना कोई नई बात नहीं है | सामान्य तौर पर एक स्थान से दूसरे स्थान पर लोगों को जाने को प्रवास की संज्ञा दी जाती है | परन्तु ऐसी परिस्थिति में जब लोगो के पास अपने जीवनयापन के लिए न चाहते हुए भी घर बार, सगे –सम्बन्धी नाते रिश्तेदार छोड़कर अन्य जगह जाने के सिवा कोई चारा नहीं होता तब उसे "पलायन" के रूप में चिन्हित किया जाता है | एक सीमा तक पलायन स्वैच्छिक होता है , जबकि पलायन किसी-न-किसी रूप में थोपा गया होता है | भले किसी परिस्थिति , व्यक्ति या सरकार द्वारा की गई हो , विभिन्न कारणों से संंयुक्त परिवारों में बिखराव , कृषि जोतो अवसर आकार में आई निरंतर कमी से होता है | खेती के लाभ का आभाव, जनसंख्या में अनियंत्रित बढ़ोतरी  ग्रामीण एवं वन्य क्षेत्र प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष बेरोजगारी में बेतहाशा वृद्धि के कारण ग्रामीण जनसंख्या का अधिकांश  हिस्सा पलायन करता है।  

विकास की लम्बी यात्रा तय करने के बावजूद प्रतिवर्ष बढ़ते हुए आंकड़े देश के निर्धन और वंचित एक बढे वर्ग के श्रम के प्रति सम्मान का वातावरण बना सकने में सफल नहीं हो पाए | सामाजिक न्याय के विकल्प संस्करणों ने प्राय: आधे से ज्यादा भाग में अवसरवाद और स्थिर की ऐसी पृष्ठभूमि तैयार कर दी है कि जिसमे आमजन दर-दर भटकते जा रहा है | कोरोना महामारी से दूसरी लहर बहुत ही ज्यादा बेलगाम हो गई है | इसका प्रादुर्भाव शहरों से ज्यादा ग्रामीण आंचल में हो रहा है | और बढ़ते कोरोना मरीज की संख्या में वृद्धि हो रही है  | कोरोना का दुष्परिणाम इस तरह बढ़ रहा कि सरकार मजबूरन पूरे  राज्य में तालाबन्दी  कर रखी है , इसी कारण कार्यरत श्रमिकों को भी घर लौटकर वापस आना पड़ रहा है | जिससे उनके सामने रोजगार  की भीषण समस्या पैदा हो गई है , चाहकर भी लोग रोजगार के लिए बाहर नहीं जा सकते है | राजस्थान का बांसवाडा जिला भी इस महामारी के दुष्प्रभाव से  पलायन की दंश से अछूता नही है | 

ऐसी विकराल भयावह परिस्थिति में राजस्थान के बांसवाड़ा जिले के प्रेमशंकर मईडा जी अध्यक्ष जनजातीय स्वराज संगठन के माध्यम से अपने घाटोल क्षेत्र में पलायन रोकने लिए और लोगो को विविध सरकारी योजनो से लाभान्वित करने हेतु सतत प्रयासरत है | जनजातीय स्वराज संगठन के चयनित प्रक्रिया बैठकों का संचालन अपनी जिम्मेदारियां उनके बताते हुए 2018 में वाग्धारा ने सच्चे स्वराज स्थापित करने हेतु जनजातीय स्वराज संगठन घाटोल का गठन किया | उसमे 35 गांव के ग्राम विकास एवं बाल अधिकार समिति के प्रतिनिधियों ने मुझे चयनित किया यह संगठन हमारे समुदाय द्वारा जो समुदाय के हित के लिए कार्य करने हेतु गठित किया गया है |  


जनजातीय स्वराज संगठन घाटोल   की उपलब्धियां  और गतिविधियां  के बारे मे 

बताते प्रेम शंकर मईडा

 
 

 
जनजातीय स्वराज संगठन का कार्य हमारे क्षेत्र के सभी वंचित परिवारों के साथ मिलकर वंचित, निर्धन, गरीब, असहाय परिवार जो लोग समाधान के लिए समुदाय जागरूक करते रहे और उनके समस्याओं को बड़े स्तर पर ले जाकर समुदाय के सर्वांगीण विकास पर चर्चा के लिए हर वर्ग मुख्यतया यूवा, महिला, एवं पुरुष की सामान भागीदारी सुनिश्चित करना और ग्राम चौपाल को पुनर्जीवित करना समुदाय में कृषि पोषण स्वास्थ्य शिक्षा पशुधन एवं आजीविका में सुधार हेतु निर्मित होने वाली कार्य योजना समुदाय  की भागीदारियों से तैयार करना |

समुदाय के विकास में परमपरागत एवं देशज अभ्यासों एवं ज्ञान को जैसे हलमा, नोत्र , हिरमा, जैविक खेती इत्यादि को सम्मिलित करना एवं प्राथमिकता प्रदान करना | सरकारी तंत्र के साथ मिलकर परिवारों को सरकारी योजनाओं और कार्यक्रमों के बारेमे अवगत करवाना | अपितु समुदाय को उसके बारे में लाभान्वित करवाने हेतु निरंतर संगठन के माध्यम से कार्य करते रहना | महिला सशक्तिकरण को प्रोत्साहित करना तथा भौतिक-आर्थिक-सामाजिक एवं न्यायिक मुद्दों में महिलाओ के निर्णय को शामिल करना | समुदाय एक संगठन जो सरकार को सरकार द्वारा गरीबी उन्मूलन एवं समुदाय का विकास हेतु सेवाओ  में सुदृढ़ बनाने में इसमें बदलाव हेतु अनुसंशा प्रदान करना |

इसी  उद्देश्य से जनजातीय स्वराज संगठन गठित हुआ | लोगों द्वारा लोगो के लिए स्वराज को लोगो की सरकार के रूप में परिभाषित करना | स्वराज को सरकार का बेहतरीन रूप प्रदान करना | जिसमे प्रत्येक व्यक्ति महिला एवं पुरुष, युवा , बच्चे सचेत रूप से सहभागी होना जिसमे लोग अपनी नियति निर्धारित करने वाली संप्रभुता शक्ति बनते है | 

 

जनजातीय स्वराज संगठन के अध्यक्ष प्रेमशंकर मईडा अपने संगठन  की भूमिका  के बारे में बताते हैं कि यह संगठन जनजातीय लोगों की समस्याओं के प्रति जागरूक रहकर समस्या का समाधान खोजने हेतु सतत प्रयत्नशील है |मनरेगा के तहत   रोजगार दिलाने के लिए और पलायन पर रोकने के लिए जनजातीय स्वराज संगठन की उपलब्धियों को बताते है कि मनरेगा के तहत हमने 3  तलावडी बनवाइ  जिसमे  4 .5 लाख का खर्चा सरकारी योजना से प्राप्त हुए  |   

किसानों ने अपने तरफ से खर्चा नहीं किया यह सब सरकारी योजना के माध्यम से उनको लाभान्वित किया | यह सब हम ने खेती सिचाई युक्त होने और जमीन का कटाव रोकने और पानी की लेवल सही रहे इसके लिए किया और आगे बताते है की 2 चेकडैम बनवाए ,2 एनिकट ,यह सब सरकारी परियोजना पंचायत समिति एवम ग्राम पंचायत के अधिकारियोसे वकालत और हिमायत करके किया और  आगे मईडा जी बताते है की बाहर रोजगार करने हेतु लोग गये थे  व गाव में वापस आये तो उनको रोजगार की समस्या थी क्यूकी तालाबंदी के कारण  वो बेरोजगार हो गये इसके लिए हमने 150  लोगो की मनरेगा के तहत सगठन के मध्यम से  ग्राम पंचायत से बातचीत करके रोजगार दिलवाए और् उन लोगो को लाभान्वित किया | 40 लोगो को रेसन कार्ड बनवाए और  जों गरीब और वंचित थे उनको पंचायत समिति और तहसील ले जाकर उन लोगो को सरकारी योजनोसे लाभान्वित किया | 100 लोगो को मनरेगा के तहत मेडबंदी करवाई ताकि मिट्टी का कटाव रोका जा सके यह सब सगठन के मध्यम से हुआ है और आगे भविष्य में समुदाय के विकास के लिए प्रयासरत रहेंगे ।

 

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