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स्वराज संगठन का विकास एवं क्षमतावर्धन कार्यक्रम संपन्न

 स्वराज संगठन सदस्यों के नेतृत्व विकास एवं क्षमतावर्धन कार्यक्रम में 

महाराणा प्रताप कृषि विश्व विद्यालय के कुलपति महोदय ने लिया भाग 

विकास मेश्राम
vikasmeshram04@gmail.com 
जनजातीय संगठन सहयोग इकाई, मानगढ़ का संगठन के पदाधिकारियों का तीन दिवसीय प्रशिक्षण दिनांक 16 फरवरी को आरम्भ हुआ, जिसका प्रारंभ प्रशिक्षक मुरारी जी ने किया । वाग्धारा संस्थान से विशेषज्ञ पी एल पटेल जी ने प्रशिक्षण में आए महाराणा प्रताप कृषि विश्व विद्यालय के वाइस चांसलर (कुलपति) श्री नरेन्द्र सिंह जी, राठौड़, डॉ. शांति कुमार जी निर्देशक अनुसंधान, महाराणा प्रताप कृषि विश्व विद्यालय, डॉ. डी पी सैनी ज्वाइंट डायरेक्टर कृषि अनुसंधान बोरवट, डॉ. आर. बी दुबे एसोसियेट डायरेक्ट उद्यान विभाग, डॉ. हरलाल कृषि अनुसंधान बोरवट, डायरेक्टर एग्रो नोमी, डॉ. पी के कल्याण एसोसियेट प्रोफेसर किट विज्ञान, डॉ. प्रमोद कुमार रोकड़िया जी का स्वागत और अभिवादन किया। 

वाग्धारा संस्थान सचिव जयेश जोशी ने प्रशिक्षण में आए अधिकारियों का साफा एवं माल्यार्पण कर स्वागत किया । जयेश जोशी ने  जनजातीय स्वराज संगठन और वाग्धारा के प्रयासों में बताया कि जनजातीय स्वराज संगठन आदिवासी समाज की जीवन शैली के उत्थान एवं परिवर्तन के लिए कार्य कर रही है, जिसमें  सच्ची खेती, सच्चा स्वराज, व सच्चा बचपन के लिए संस्थान प्रयासरत है, आदिवासी किसान को स्वालंबन की सोच को आगे बढ़ाने के लिए संस्था उत्कृष्ट कार्य कर रही है। 
जयेश जी ने महाराणा प्रताप कृषि विश्व विद्यालय, से आए अधिकारियों से आग्रह किया कि वो इस प्रशिक्षण में आए जनजातीय स्वराज संगठन के सदस्यों को मार्गदर्शन करें जिसमें जोशी जी बताया कि नेचुरल फार्मिंग में बीज व परिस्थितियों का बड़ा योगदान होता है।  हम किसानों की  लागत को कम कर सके उसके लिए आगे क्या कार्य कर सके और कृषि हमारी संस्कृति है, जिसके लिए युवा को कृषि से कैसे जोड़ें और उनको एक नेतृत्व कर्ता कैसे बनाए ?  

डॉ. शांति कुमार जी निर्देशक अनुसंधान, महाराणा प्रताप कृषि विश्व विद्यालय, उदयपुर के बारे में विस्तृत जानकारी से अवगत कराया और उसी के आगे प्रशिक्षण में आए मुख्य अतिथि श्री नरेन्द्र सिंह राठौड़ ने कृषि से जुड़े मुख्य विषय पर अपनी बात कही, जिसमें उन्होंने एकीकृत कृषि को महत्व देते हुए किसानों को यह संदेश पहुंचाने पर बताया, नरेंद्र जी ने कृषि के मुख्य पांच बातों पर अपने विचार व्यक्त किए जिसमें पहला) गुड एग्रीकल्चर प्रेक्टिस, दूसरा) एग्रीकल्चर के लिए नए मार्केट का डेवलपमेंट करना, तीसरा) किसानों को कृषि के लॉन सुविधा उपलब्ध करवाना, चोथा) पशुओं के लिए बीमा सुविधा ही, पांचवा) नई तकनकें और परमपरागत तकनीकों का सही तरीका से उपयोग करना, उसी के साथ कुलपति महोदय ने किसानों को एकीकृत कृषि पद्धति को करने के लिए मोटीवेशन की बात कही और आगे वाग्धारा संस्थान के साथ MOU करके किसान को कम लागत में अच्छी पैदावार के साथ आमदनी में वृद्धि हो उसके लिए मिलकर कार्य करेंगे।

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