अमृतांज इंदीवर
खाना बनाने के समय ही गैस को जलाए, मोटे बर्तनों का प्रयोग न करें, प्रेशर कूकर का प्रयोग अधिक से अधिक करें, ढककर करें कुकिंग, थर्मस फ्लासक का करें प्रयोग, खाने की मात्रा पहले निर्धारित करें, सब्जी , चावल, रोटी आदि बनाने से पहले पूरी सामग्रियों की करलें तैयारी, चूल्हे के बर्नर की सफाई करें ताकि सही ढंग से चूल्हा का ईंधन उपयोग में आये आदि बातों की शिक्षा देना महिलाओं को आवश्यक है।
घरेलू गैस बचाने के लिए गांव की महिलाओं को प्रशिक्षित करना पड़ेगा। खासकर गांव की महिलाएं परंपरागत तरीके से अर्थात् धुआं देने वाले चुल्हे लकड़ी और कोयले पर खाना बनाती रही हैं। जिसकी वजह से एक तो प्राकृतिक ईंधन की खपत बढ़ रही है तो वहीं आये दिन घरेलू गैस लिकेज से आग लगने की घटना बढ़ रही है। ग्रामीण स्तर पर महिलाओं को एलपीजी गैस के बारे में पूरी जानकारी देना आवश्यक है। साथ ही उन्हें खपत कम करने एवं सुरक्षित उपयोग करने की सीख देनी पड़ेगी।
घरेलू गैस की करें बचत : घर की लक्ष्मी स्त्री होती है। वह शिक्षित और समझदार हो तो निश्चित रूप से रसोई से लेकर पूरे घर तक को स्वर्ग बना देती है। अज्ञानता, लापरवाही की वजह से घरेलू गैस की खपत गांव में बढ़ती जा रही है। सबसे बड़ा कारण तो यह है कि महिलाएं खाना बनाने के साथ-साथ कई काम को पूरा करने में एक साथ लग जाती है।जैसे कपड़ा धोना, बर्तन साफ करना, सब्जी काटना, फोन पर मूवी देखने मे मशगूल हो जाना आदि। जिसकी वजह से गैस चूल्हे से ध्यान हट जाता है और ऐसे ही घरेलू गैस जलती रहती है।
घरेलू गैस क्या है : घर में रसोई बनाने में प्रयुक्त होने वाली गैस को घरेलू गैस कहते हैं। यानि एलपीजी एवं प्राकृतिक गैस। पहला प्रोपेन और ब्यूटेन से बनी होती है, दूसरी मिथेन और इथेन गैसें होती हैं। एलपीजी का पूरा नाम द्रवित पेट्रोलियम गैस जो घरेलू गैस के रूप में प्रयोग की जा रही है। प्राकृतिक गैस जिसे बायोमास से उत्पन्न की जाती है। गोबर गैस इसका उदाहरण है। पहले गांवों में बायोगैस से ही घर रौशन रहता था। और रसोई घर में भोजन पकाया जाता था। घरेलू गैस काफी ज्वलनशील पदार्थ है।
ऐसे करें महिलाओं को शिक्षित : महंगाई आसमान छू रही है। ऐसे में गृहिणियों को शिक्षित करना बेहद जरूरी है। खाना बनाने के समय ही गैस को जलाए, मोटे बर्तनों का प्रयोग न करें, प्रेशर कूकर का प्रयोग अधिक से अधिक करें, ढककर करें कुकिंग, थर्मस फ्लासक का करें प्रयोग, खाने की मात्रा पहले निर्धारित करें, सब्जी , चावल, रोटी आदि बनाने से पहले पूरी सामग्रियों की करलें तैयारी, चूल्हे के बर्नर की सफाई करें ताकि सही ढंग से चूल्हा का ईंधन उपयोग में आये आदि बातों की शि क्षा देना आवश्यक है।
घरेलू गैस के लिए सावधानियां : घरेलू गैस के उपयोग करने से पहले कुछ सावधानियों का ध्यान रखना लाजिमी होता है। क्योंकि छोटी सी गलती किसी भारी मुसीबत को दावत दे सकती है। अक्सर गैस लिकेज सिरेंडर में आग लगने का कारण बनता है। समय-समय पर नहीं देखरेख की वजह से दुर्घटना होने की संभावना काफी बढ़ जाती है। खासकर गैस का रिसाव होता रहता है और गृहिणी अनदेखा करती रहती हैं। जिसकी वजह से माल-जान की हानि तो होती ही है साथ ही आसपास के लोगों को भी काफी नुकसान उठाना पड़ता है। कई बार घर की छत और दीवारें दरक जाती है।
घरेलू गैस के उपयोग से पहले रखें ध्यान :
- बीआइएस उपकरणों का प्रयोग करें।
- सिलेंडर लेने के पूर्व सील और सुरक्षा टोपी (कैप) की अच्छी तरह से जांच करना आवश्यक है।
- सिलेंडर की कैप को उसके साथ ही रहने दें, ताकि जरूरत पड़ने पर बंद किया जा सके।
- समय-समय पर पाइप, चूल्हा और रेगुलेटर की जांच कराते रहें।
- हरेक घर में एक कम वजन का ही अग्निशामक यंत्र रखना चाहिए।
घरेलू गैस के रिसाव के वक्त क्या करें :
- गैस रिसाव के समय पैनिक न हों।
- रसोई घर की खिड़कियां खेल दें।
- रेग्यूलेटर को ऑफ करें।
- इससे भी बंद न हो, तो सेफ्टी कैप सिलेंडर का लगा दें।
- नियंत्रण न होने की स्थिति में आग बुझाने वाले सिलेंडर (अग्निशामक यंत्र) का प्रयोग करें।
- टॉल फ्री नंबर (1906)पर कॉल करके स्थानीय गैस डीलर और अग्निशामक दस्ता को जानकारी दें।
- संभव हो तो सिलेंडर को रसोई से अलग हटाकर खुले स्थान पर रखने की कोशिश करें।
- भारत सरकार की ओर से घरेलू गैस रिसाव और अग्नि कांड से सुरक्षा के लिए एक हेल्पलाइन चालू की गई है। 1906 पर ततकाल शिकायत दर्ज करें और इमरजेंसी सेवा पाएं।
वस्तुतः यह जानकारी गांव की महिलाओं को देना बेहद जरूरी है। जिसके जरिए घरेलू गैस के साथ ही पैसे की भी बचत होगी। और जान-माल की भी सुरक्षा का ध्यान रहेगा। समय-समय पर गैस चूल्हा रिपेयरिंग सेंटर में जाकर चूल्हे की गड़बडियों को भी ठीक कराना उतना ही जरूरी है। थोड़ी सी लापरवाही घरेलू गैस के दुरूपयोग का कारण बनता है। साथ ही बड़े खतरे को भी निमंत्रण देता है। अतएव घरेलू गैस बचाने के लिए गांव की महिलाओं को शिक्षित करना काफी आवश्यक बन जाता है। बिना प्रशिक्षण के कई समस्या साथ-साथ बनी रहती है।



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