कोरोना से निबटने में आशा कार्यकर्त्ता के लिए मार्गदर्शक बनी वाग्धारा

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कोरोना से निबटने में आशा कार्यकर्त्ता के लिए मार्गदर्शक बनी वाग्धारा

  

Vikas Meshram 

वाग्धारा संस्था कोरोना काल के दौरान निरंतर संस्थागत व मानवता की सेवा में तत्पर रही।  वाग्धारा के कार्यकर्त्ता के साथ आशा कार्यकर्ताओं ने एक योद्धा के रूप में जान की परवाह किए बिना सेवा कार्य में लगे रहें।  इससे सम्बंधित रपट संस्था की ओर  से प्रस्तुत है -

बाँसवाड़ा, राजस्थान।  कोरोना (COVID-19) संकट से निपटने के लिए पूरा देश एकजुट हो चुका था । सभी नागरिक अपने अपने स्तर पर इस महामारी से लड़ने का प्रयास कर रहे थे । आम जनता जहां लॉकडाउन का पालन करते हुए स्वयं को घरों तक सीमित रखे हुए थे , वहीं स्वास्थ्यकर्मी और प्रशासन भी एक योद्धा की तरह इस संकट से निपटने के लिए अपना महत्वपूर्ण योगदान दे रहा थे । आज भी चौथी ;लहार की आशंका के मद्देनज़र संस्था सेवा कार्य में जुटा  हुआ है। 

कोरोना मरीजों की लगातार बढ़ती संख्या के बावजूद देश भर के स्वास्थ्यकर्मी जान जोखिम में डाल कर पीड़ितों के इलाज करने में जुटे हुए हैं। देश के  राजस्थान में भी कोरोना एक गंभीर संकट बनता जा रहा था । 

आज भी ऐसी परिस्थितियों में, वागधरा सस्था के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों में आशा कार्यकर्त्ता भी अपना फर्ज़ बखूबी निभा रही हैं। बाँसवाड़ा  जिले की छाजा पंचायत समिति के ग्रामीण क्षेत्रों में काम कर रही आशा हैल्थ वर्कर, कोरोना को हराने में समाज के साथ कंधे से कंधा मिलाकर जुटी हुई हैं।एक तरफ जहां लोग कोरोना के कहर से चिंतित हैं और अभाव से उत्पन्न कष्टों को झेलते हुए घरों की सीमाओं में बंधे हैं, वहीं आशा कार्यकर्त्ता अपने हुनर, ज्ञान और क्षमता के अनुसार लोगों की मदद करने में जुटी हुई हैं। 

जननी एवं शिशु सुरक्षा की सेवाएं घर-घर पहुंचाने तथा मातृ एवं शिशु मृत्यु दर को कम करने की उद्देश्यपूर्ति के लिए  वागधरा सस्था एवम स्वास्थ्य विभाग और जनजातीय  समुदाय के बीच मजबूत कड़ी का काम करने वाली वागधरा कायकर्ता के प्रभाग  अगंन वाडी कायकर्ता आशा वर्कर कोरोना उन्मूलन की जंग में भी दिन-रात सेवाएं दे रही हैं।

छाजा, पंचायत समिति के गांवों में संस्थागत प्रसव और टीकाकरण, परिवार नियोजन, किशोरी स्वास्थ्य संबंधी राष्ट्रीय कार्यक्रमों में मिली उपलब्धियों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली आशा वर्कर, कोरोना जैसी महामारी को मात देने के लिए अतिरिक्त सेवाएं देने के लिए स्वप्रेरणा से जुट गई हैं।

इस मुश्किल समय में आशा कार्यकर्ता गांव के एक-एक परिवार पर नजर रखती है| बाहर से आने वाले व्यक्तियों का सर्वे कर विभाग को अवगत कराने, नागरिकों को स्वास्थ्य संबंधी मुश्किलें आने पर उपचार के लिए अस्पताल तक पहुंचाने की व्यवस्था करवाने, लगातार साबुन से हाथ धोने और बचाव के लिए व्यक्ति से व्यक्ति के बीच दूरी बनाए रखने के लिए लोगों को जागरूक करने, जैसे महत्वपूर्ण कार्यों को अंजाम दे रही हैं।

लॉकडाउन जैसी स्थिति में ग्रामीण क्षेत्रों में मजदूरी पर टिके जीवन में, इस समय कई प्रकार के संकट उत्पन्न हुए हैं। खासतौर पर राशन, सब्जियां, दूध, फल आदि की पहुंच कम होने का असर महिलाओं और बच्चों की सेहत पर पड़ सकता है। 

विशेषकर यह गर्भवती महिलाओं और नवजात बच्चों को दूध पिलाने वाली महिलाओं के लिए सबसे मुश्किल घड़ी है। वहीं दूसरी ओर पहले से कुपोषण के चक्र में फंसी महिलाओं और बच्चों के लिए भी कोरोना एक बड़ा संकट बन कर आया है। 

इस विपत्ति के खिलाफ यह आशा कार्यकर्त्ता दिन रात एक करते हुए अपने कार्यों को अंजाम दे रही हैं। इनकी सेहत को बनाये रखने और कुपोषण से इन्हें बचाने के लिए आशा वर्कर इनके परिवारों को खान-पान की विशेष हिदायतें देकर, कारोना की जंग में जीत हासिल करने के लिए अतिरिक्त कार्य कर रही हैं।वागधरा ने जनातिय समुदाय को निःशुल्क मास्क ,उपलब्ध करवाया

इस संबंध में छाजा  के आशा सुपरवाइजर रमिला अहारी  ने बताया कि अधिकांश आशा कार्यकर्त्ता अपने सरकारी कार्यक्रमों की जिम्मेदारी निभाने के अलावा, वागधरा ने जनातिय समुदाय को दी गई कोरोना प्रबंधन किट  को निःशुल्क वितरित कर रही हैं। 

नयागाव पंचायत  की आशा कार्यकर्त्ता श्रीमती कंकू देवी डामोर , जिन्हें उत्कृष्ट सेवाएं देने के लिए ब्लॉक स्तर पर सम्मानित किया गया था, उन्होंने अब तक ५००  मास्क वितरण किए हैं वागधरा ने जनातिय समुदाय को निःशुल्क मास्क ,उपलब्ध करवाया जो ।

इसी प्रकार  आनदं पूरीप्रखड के पाटिया  की निर्मलादेवी  ने 220 , छायना  की रामू देवी ने 150, रातीतलाई  की नर्मदा ने 275, भवानपुरा की बबलीदेवी ने 150, मडकोला मोगजी  की कालीदेवी  ने 250, बरजदिया की सर्मिला देवी  ने 345, बोरी की सविता देवी ने 250,  चोथमल की मंजुलादेवी  ने 150, भुजेला की  परिदेवी  ने 350  जेतियावाडा की रतनदेवी 225 ,कानेला की कान्तादेवी   ने 250  मास्क  बांटे हैं

मुश्किल की इस घड़ी में कोरोना को हराने में स्वास्थ्य टीम के साथ-साथ आशा वर्कर्स भी अपनी क्षमताओं के अनुसार हर संभव प्रयास कर रही हैं। ऐसे समय और परिस्थितियों में जमीनी स्तर पर इनकी भूमिका बहुत अहम हो गई है। जिसे यह बखूबी अंजाम दे रही हैं। 

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