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नारी बिना संसार अधूरा है, औरत कोई सामान नहीं

नारी बिना संसार अधूरा है, औरत कोई सामान नहीं

 नारी के बिना

सोनू आर्य

मिकिला, कपकोट

बागेश्वरउत्तराखंड

 

नारी बिना संसार अधूरा है

खुशबू बिना जैसे फूल अधूरा है।।

जैसे संसार बिना इंसान अधूरा है

धरती बिना अंबर अधूरा है।।

बिना सांस जैसे जिस्म अधूरा है

वैसे ही नारी बिना जीवन अधूरा है।।

नारी बिना घर अधूरा है

बाती बिना जैसे दीपक अधूरा है

वैसे ही नारी बिना हर रिश्ता अधूरा है।।


(चरखा फीचर)

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औरत कोई सामान नहीं


नीलम ग्रेंडी

चोरसौ, गरुड़

बागेश्वरउत्तराखंड

 

औरत है, कोई सामान नहीं

अकेली है, मगर कमजोर नहीं।।

सिर्फ जिस्म नहींजान भी होती है

आत्मा हर पल उसकी रोती है।

छूटा अपनों का साथ, मां की ममता वह दुलार

सोचा मिलेगा नया घर, नया संसार।।

दर्द अपनों से मिलातकलीफ भी अपनों से

घुट सी गई अंदर ही अंदरबिखर गई वह टूट कर

बहुत रो लिया अब हंस करजीना चाहती है

सिमट गई थी बहुत वह, अब बिखरना चाहती है।।

बगिया के फूलों की तरह बस निखरना चाहती है

टूटना नहीं, पिघल कर बह जाना चाहती है

अपनी थोड़ी सी खुशियों को जी भर कर जीना चाहती है

क्योंकि वह औरत है कोई सामान नहीं।।।।


(चरखा फीचर)

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