नवोदित कवि
उज्ज्वल कुमार ईशु
सिर्फ़ पाने के लिए दौड़ते भागते रहना ही जीवन नहीं,
जीवन है शांति को पाना,
मुट्ठी में रेत भर, आसमां की अनंतता की ओर देखते हुए
बीतते वक़्त और रेत की फिसलन को
महसूस करना भी जीवन है।
सब कुछ पा लेना ही जीवन नहीं,
सब-कुछ खोकर भी, हंसते मुस्कुराते हुए
बहुत कुछ वापिस पा लेने की
कोशिश ही जीवन है।
केवल लक्ष्य बेधना ही जीवन नहीं,
लक्ष्य की प्राप्ति के लिए तरकश के बाणों को
प्रत्यंचा पर चढ़ाने की तपस्या
भी जीवन है।
समुद्र की विशालता ही जीवन नहीं,
उसी विशाल समुद्र की बूंद को
हथेली पर रखकर
उस इकाई की सूक्ष्मता का अनुभव भी जीवन है।
.jpg)
0 टिप्पणियाँ