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चाह नहीं है अब मुझको

पायल रावल

चोरसौगरुड़

बागेश्वरउत्तराखंड

चाह नहीं है अब मुझको


चाह नहीं है अब मुझकोकहलाऊँ मैं सीता जैसी।

अब तो बस उड़ना चाहती हूंबिल्कुल कल्पना जैसी।।

फिर क्यों बनूं मैं द्रौपदी जैसी।

कहां बचा है कोई अब कृष्ण जैसा।।

अब तो बस लड़ना चाहूंलड़ाई मैरी कॉम जैसी।।

चाह नहीं हैं अब मुझकोउपमा मिले गाय जैसी।

अब तो मैं बन के दिखाऊंशान से किरण बेदी जैसी।।

फिर क्यों बनूं सावित्री जैसीकौन बचा है सत्यवान अब।

अब तो बस लिखना चाहूँविचार सरोजिनी नायडू जैसी।।

चाह नही है अब मुझकोजेवर से मैं लद जाऊं।

अब तो बस जीना चाहूँआत्मनिर्भर स्वावलंबी जिंदगी ऐसी।।


चरखा फीचर

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