मुजफ्फरपुर। दिल्ली की गैर-लाभकारी संस्था चरखा डेवलपमेंट कम्युनिकेशन नेटवर्क की ओर से आयोजित पांच दिवसीय लेखन कार्यशाला गुरुवार को संपन्न हुआ । मझौलिया स्थित निर्देश ट्रेनिंग सेंटर में आयोजित इस कार्यशाला में लेखन में रुचि रखने वाले ग्रामीण लेखकों को सामाजिक मुद्दों पर लेख लिखने का प्रशिक्षण दिया गया।
इस अवसर पर चरखा के सलाहकार संपादक शम्स तमन्ना ने कार्यशाला को संबोधित करते हुए कहा कि वर्तमान समय में जब मीडिया में ग्रामीण क्षेत्रों की खबरों को बहुत कम स्थान मिलता है, ऐसे में चरखा लेखकों की जिम्मेदारी बहुत अधिक बढ़ जाती है। चरखा लेखक वैकल्पिक पत्रकार के रूप में समाज में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि इसके माध्यम से ग्रामीण लेखक गांव के सामाजिक मुद्दों पर लिखते हैं जिसे चरखा के माध्यम से देश के प्रमुख हिंदी, अंग्रेजी और उर्दू के समाचारपत्रों, पत्रिकाओं और वेबसाइट पर प्रकाशित किए जाते हैं।
कार्यशाला में रिसोर्स पर्सन के रूप में वरिष्ठ पत्रकार, समाजसेवी और शिक्षाविद डॉ संतोष सारंग ने प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए कहा कि मुद्दों को पहचानना और उसे प्रभावी रूप से प्रस्तुत करना महत्वपूर्ण है। उन्होंने प्रतिभागियों को आलेख लिखने की नीतियों को बारीकी से भी समझाया। श्री सारंग ने प्रतिभागियों का मार्गदर्शन करते हुए कहा कि लिखने के साथ साथ पढ़ना भी महत्वपूर्ण है। एक अच्छा लेखक वही हो सकता है जो एक अच्छा पाठक होगा।
कार्यशाला में औराई, गायघाट, पारू और साहेबगंज से अमृत राज, बैजू कुमार, चांदनी कुमारी, गुड़िया कुमारी, जितेंद्र कुमार, कल्पना कुमारी, कुमारी रेखा, ममता देवी, नीतू कुमारी, पम्मी कुमारी, राजन कुमारी, रिमझिम कुमारी, सपना कुमारी, नैना सुहानी, साक्षी कुमारी, शिल्पा कुमारी, सिमरन सहनी, वंदना कुमारी आदि कई ग्रामीण लेखकों ने भाग लिया, जिसमें बड़ी संख्या महिलाओं की थी। इस मौके पर अप्पन समाचार की संपादक डाॅ रिंकु कुमारी मौजूद थी।
पांच दिवसीय लेखन कार्यशाला के चौथे दिन प्रतिभागियों को चरखा के वोलेंटियर ट्रेनर अमृतांज इंदीवर के मार्गदर्शन में सरैया स्थित गोविंदपुर जैविक ग्राम का भ्रमण भी कराया गया ताकि वह फील्ड के कामों की बारीकियों को समझ सकें। धन्यवाद ज्ञापन चरखा के लेखक व समाजसेवी फूलदेव पटेल ने किया।
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