गांव के सामाजिक मुद्दों को लेखन के माध्यम से मीडिया में उजागर करने वाली दिल्ली स्थित चरखा डेवलपमेंट कम्युनिकेशन नेटवर्क की ओर से मुजफ्फरपुर में पांच दिवसीय लेखन कार्यशाला का शुभारंभ किया गया। रविवार से शुरू हुआ यह कार्यशाला गुरुवार तक मझौलिया स्थित निर्देश ट्रेनिंग सेंटर में आयोजित किया जाएगा। इस कार्यशाला में प्रतिभागियों को ग्रामीण क्षेत्रों के विभिन्न सामाजिक मुद्दों की पहचान करना और उन्हें किस प्रकार आलेख में परिवर्तित किया जाए कि स्थानीय और राष्ट्रीय स्तर के समाचारपत्र प्रकाशित करें, आदि विषयों का प्रशिक्षण दिया जाएगा।
कार्यशाला की शुरुआत करते हुए मुजफ्फरपुर स्थित चरखा के वोलेंटियर ट्रेनर अमृतांज इंदीवर ने कहा कि इसके माध्यम से ग्रामीण स्तर के युवाओं को अपने क्षेत्र की समस्याओं को राष्ट्रीय स्तर पर प्रकाशित करवाने का अच्छा अवसर प्राप्त होगा। दिल्ली से आए चरखा के सलाहकार संपादक शम्स तमन्ना ने प्रतिभागियों को चरखा की स्थापना और इसके उद्देश्य से परिचित कराया, उन्होंने बताया कि किस प्रकार चरखा के संस्थापक संजॉय घोष ने समाज के अंतिम व्यक्ति की आवाज को बुलंद करने के लिए अपना बलिदान दिया।
कार्यशाला को संबोधित करते हुए जिला के वरिष्ठ पत्रकार, समाजसेवी, शिक्षाविद और अप्पन समाचार के संस्थापक संतोष सारंग ने कहा कि वर्तमान में ग्रामीण लेखन का महत्व बढ़ा है और चरखा के माध्यम से युवा इस क्षेत्र में अपना भविष्य बना सकते हैं। उन्होंने लेखन के विभिन्न आयामों की चर्चा करते हुआ प्रतिभागियों को मुद्दों को समझने और इसे प्रभावी रूप से लिखने के तरीकों के बारे में समझाया।
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| इस मौके पर चरखा के शम्श तमन्ना को पौधा देकर सम्मानित करते फूलदेव जी |





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