Amritanj Indiwar
भारत में जैविक खेती इस समय 43 लाख 39 हजार हेक्टेयर से भी अधिक रकबा में होती है। करीब 35 लाख टन जैविक उत्पादन होता है। आज के समय में जैविक खेती की उपयोगिता लगातार बढ़ती जा रही है। इसमें रसायनों का इस्तेमाल नहीं होता है इसीलिए यह पर्यावरण और मानव सेहत के लिए लाभदायक है। दूसरी तरफ जैविक उत्पादों का मार्केट में अच्छा मूल्य भी मिलता है। यही वजह से भारत के किसान तेजी से जैविक खेती की तरफ उन्मुख हो रहे हैं। जैविक खेती के मामले में वैश्यिक स्तर पर भारत प्रथम स्थान पर है। सबसे अधिक कृषक जैविक खेती करते हैं और जिसका आंकड़ा निरंतर बढ़ता जा रहा है।
भारत में जैविक खेती और सरकारी अनुदान
बढ़ती जनसंख्या को भोज्य पदार्थों की भरपाई करना आसान नहीं है। भरपेट भोजन के लिए ज्यादा खादय का उत्पादन बेहद जरूरी है। भारत में कम जमीन पर ज्यादा उपज के लिए खेतों में रासायनिक उर्वरक का इस्तेमाल होता है इससे उपज तो बढ़ जाती है लेकिन स्वास्थ और पर्यावरण के लिए काफी खतरनाक है। रासायनिक मिट्टी की उर्वरा शक्ति पर बुरा असर पड़ रहा है। रासायनिक खेती से नुकसान की दुनिया भर में चिंता है। जिसको लेकर जागरूकता, रिसर्च व नए तकनीक का विकास किया जा रहा है।
आर्गेनिक खेती के लायक जमीं की उर्वरता बनाने में लगता है समय :
जैविक खेती रसायनों के इस्तेमाल को रोकने के लिए एक विकल्प के तौर पर कृषि वैज्ञानिक व किसान लगे हुए हैं। इसे प्रोत्साहित करने के लिए दुनिया भर में अनेक योजनायें चल रही है। जैविक खेती में रासायनिक उर्वरकों की जगह गोबर की खाद या कम्पोस्ट का इस्तेमाल होता है। कीटनाशकों की जगह नीम का घोल, मट्ठा, मिर्च या लहसुन के अलावा लकड़ी की राख या गोमूत्र आदि का प्रयोग किया जा रहा है।
किसी भी खेत की मिट्टी को पूरी तरह से ऑर्गनिक बनाने में 3 वर्ष का समय लगता है। यह प्रोसेस धीमी मगर बेहतर है। ऑर्गनिक खेती से मिट्टी की गुणवत्ता व उर्वरता बढ़ जाती है। मिट्टी में जलधारण करने की शक्ति में इजाफा हो जाती है। यानि सिंचाई के बाद मिट्टी में नमी बरकरार रहती है।
भारत में फसल का अवशेष बेकार चले जाते हैं जबकि सही इस्तेमाल से एक बेहतरीन जैविक खाद है तैयार हो सकता है। जैविक खेती किसानों की आय बढ़ाने का अच्छा उपाय है। जैविक उत्पादित साग , सब्जी, अनाज, फल आदि की बाजार में अच्छी मांग है और देश-विदेश में निर्यात भी खूब हो रहा है।
दुनिया के कुल जैविक उत्पादन का लगभग 30 प्रतिशत हिस्सा भारत का है :
अपने देश में धीरे-धीरे जैविक खेती का दयारा और भूमि क्षेत्र बढ़ रहा है। जैविक खेती करने वालों की संख्या सबसे ज्यादा भारत में है। दुनिया के कुल जैविक उत्पादन का लगभग 30 प्रतिशत हिस्सा भारत का है। साल 2016 में सिक्किम वर्ल्ड का सबसे प्रथम जैविक राज्य घोषित हुआ। संयुक्त राज्य के खाद एवं कृषि संगठन (FAO) ने सिक्किम को ऑस्कर अवार्ड दिया।इसके अलावा त्रिपुरा, उत्तराखंड सहित अन्य राज्य भी जैविक खेती की दिशा में निरंतर आगे बढ़ रहे हैं।
आंकड़ों की मानें तो भारत में 43 लाख 39 हजार हेक्टेयर से भी अधिक भूमि में जैविक खेती करने के लिए रेजिस्टर्ड है। सबसे अधिक जैविक खेती मध्य प्रदेश में की जा रही है। राजस्थान, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, हिमाचल प्रदेश, बिहार, जम्मू-कश्मीर और कर्नाटक में बेहतर प्रयास जारी है।
फ़िलहाल लगभग 35 लाख टन जैविक उत्पादों का उत्पादन देश को जैविक खेती को प्रोत्साहित करने के लिए मजबूत प्रयास है। जैविक खेती - साग-सब्जी, फल, तिलहन, गन्ना, अनाज, ज्वर-बाजरा कपास, दालें, औषधीय, सुगंधित पौधे, चाय, कॉफी, फल, मसाले और मेवे भी जैविक खाद से उगाए जा रहे हैं। भारत से जैविक उत्पादों का निर्यात देश-विदेश भी हो रहा है। 2020-21 के दौरान 8 लाख 88 हजार टन से भी अधिक जैविक उत्पाद अन्य मुल्कों में किया गया।
जैविक योजना का भी मिलेगा लाभ



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