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चलो आज कुछ बैठकर बातें करें

 

प्रेमा ऐठानी

कपकोटबागेश्वर

उत्तराखंड

चलो आज कुछ बैठकर बातें करें

चलो आज कुछ बैठकर बातें करें।

थोड़ा रो लेथोड़ा हँस लेमन बस हल्का करें।।

दोस्ती की कुछ हदें गढ़े।

चलो मिलकर हम लिखे पढ़े।।

कल है क्याये किसे पता।

जिंदगी एक बेल है जिसमें है लता।।

इन लताओं से चलो कुछ बुनें।

आज बैठकर मन पसंद गाने सुनें।।

जीवन में है सुबहतो कभी काली रात।

मन में अपनी गाँठ बांध और सुन मेरी बात।।

कभी खुशी कभी हंसीजिंदगी इसी में है फंसी।

यारों सूरज सा चमकना है तो उसके जैसा जलना होगा।।

ये जीवन है इसमें कभी हसनातो कभी रोना होगा।

चलो आज अपने पिटारे से कुछ ताज़ा करें।।

अपनी कुछ यादों को मिलकर साझा करें।

फिर न जाने कब ये मौका मिले।।

रह ना जाए ये मन की बातें कहीं अधखिले।

माना कि हिम्मत टूट गईआँखों में भी निराशा है।।

चलो मिलकर हल ढूंढे दिल से बुनी ये आशा है।।।

चरखा फीचर

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