पुरखा के थकिआएल थाती, रखिह तू आबाद हो। बरिस-बरिस पर पुरखा सब के , करइत रहिह याद हो।
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Phuldev Patel
मुजफ्फरपुर। सरला श्रीवास सामाजिक सांस्कृतिक शोध संस्थान,मालीघाट,मुजफ्फरपुर के तत्वावधान में आज़ादी के अमृत महोत्सव के अवसर पर सरला श्रीवास सामाजिक सांस्कृतिक शोध संस्थान द्वारा स्वतंत्रता आंदोलन के नायकों-महानायको की यादों को जश्न के माध्यम से पुनर्स्मरण किया जा रहा हैं।इस कार्यक्रम के संयोजक लोक कलाकार सुनील कुमार है। सुनील कुमार ने कहा कि जिनका हम अंश हैं उस वंश में रहकर अपने पुरखों को याद करना हमे शांति पहुंचता हैं। आभार व्यक्त करने की भावना से हमारे भीतर सकारात्मकता का भाव पैदा होता है। हमें कुछ समय भावनात्मक होकर अपने पुरखों को याद जरूर करना चाहिए जिनके माध्यम से हम इस संसार में हैं। ओर
संस्कृति,आचार–विचार और इतिहास का सही बोध कराने एवं बच्चों तथा युवाओं के बीच आत्मिक विकास के लिए पुरखा पुरनिया संवाद सह सम्मान कार्यक्रम” मुजफ्फरपुर के विभिन्न स्थलों पर चलाया जा रहा हैं पूर्वजों ने हमारा निर्माण किया हैं। पितरों से सुख-समृद्धि का आशीष लेने के उद्देश्य से गांव समाज के लोकनायकों से लेकर देश समाज के नायक नायिकाओं को पुरखा पुरनिया संवाद के माध्यम से पूर्वजों को लगातार सरला श्रीवास सामाजिक सांस्कृतिक शोध संस्थान, सरला श्रीवास युवा मंडल, सरला श्रीवास सोशल कल्चरल रिसर्च फाउंडेशन द्वारा यादों को जश्न के माध्यम से स्मरण करते हुए।
व्यक्तित्व और आचरण निर्माण में पूर्वजों की भूमिका को हमारे चरित्र से लेकर सर्वांगीण विकास में हमारे पूर्वजों का योगदान होता हैं।पूर्वजों की आत्मा हमारे आसपास विचरण करती रहती हैं।पूर्वजों की पुण्यमृति के लिए संस्थान द्वारा समय- समय पर कार्यक्रमआयोजित किया जाता हैं। श्रद्धा और आस्था के साथ हम अपने पुरखों को पूर्वजों को याद कर व सम्मान देकर स्वयं सम्मानित होते हैं। यदि हम चाहते है की कोई हमें याद करे,सम्मान दे, तो हमें भी अपने पुरखों को याद करना व सम्मान देना होगा।


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