रिपोर्ट
फूलदेव पटेल
मुजफ्फरपुर। पारु प्रखण्ड के अन्तर्गत चांदकेवारी गांव में गणतंत्र दिवस व वसंत पंचमी के अवसर पर सावित्री बाई फुले एवं डॉक्टर भीम राव अम्बेडकर जी की पूजा-अर्चना की गयी। झण्डोतोलन के बाद इंटरमीडिएट के छात्र अमृत राज ने पूजा-अर्चना के बाद लगभग बीस छात्र-छात्राओं को एक-एक कॉपी और एक-एक कलम दे सम्मानित किया। इस पूजा-अर्चना के सबंध में पूछने पर अमृत ने बताया कि जब हमारा देश अंग्रेजों की गुलामी का दंश झेल रहा था। उस समय महाराष्ट्र के सतारा जिले के नया गाँव में 3 जनवरी 1831 ई में जन्मी सावित्री बाई ने बालिकाओं के लिए शिक्षा के क्षेत्र में अलख जगाने का काम शुरू किया था। हालांकि सावित्री बाई फुले की यह शिक्षा की ज्योति अपनी शादी के बाद ही शुरू हुई। लेकिन बचपन की जिज्ञासा ही आगे का भविष्य तय करती है। इस तरह से लडकियों को शिक्षित करने के लिए सावित्री बाई फुले के साथ उनके पति ज्योति राव फुले की अहम भूमिका था। आगे अमृत बताते हैं कि सावित्री बाई फुले के साथ उनके पति ज्योति राव फुले जी के सहयोग से भारत में प्रथम कन्या विधालय यानि एक शिक्षा समाज की स्थापना 1853 ई में की गयी।
उन्होंने 15 सितम्बर 1853 ई में पूने के भिन्डी वाडा में खोला था। जिसे उन्हें ज्ञान की अधिष्ठात्री देवी सरस्वती के नाम से भी जाने जाना लगा। राष्ट्र माता सावित्री बाई फुले ने अपने जीवन काल में लगभग कन्याओं के लिए 18 से 20 विद्यालय खोल चुकी थी। जिस समय लडकियों को घर की चौखट पार करना एक मुश्किल काम था। इससे अंदाजा लगाया जा सकता हैं कि कन्याओं के लिए कितना शिक्षा प्राप्त करना कठिन काम था। राष्ट्र माता सावित्री बाई फुले ने अपने पति एवं अन्य समाज के सहयोग से 24 सितम्बर 1873 ई को सत्य शोधक समाज की स्थापना की थी।
इस कार्यक्रम के संबंध में शिक्षक संजय भगत ने बताया कि इस तरह से हमने पहली बार विद्या की देवी, ज्ञान की अधिष्ठात्री देवी की पूजा-अर्चना देख कर काफी खुशी महसूस हो रहा है। इस तरह की पूजा-अर्चना की चर्चा सुनकर पूर्व संरपच राज कुमार दास, शिक्षक उपेन्द्र कुमार, सुरेन्द्र कुमार, चंद्रिका पटेल, धर्मेन्द्र कुमार, सुरेश पटेल, संजय पटेल, डॉक्टर प्रमेश्वर भक्त, विनोद कुमार ने काफी प्रशंसा की है।
वहीं पूर्व जिला पार्षद देवेश चंद्र ने बताया कि यह एक बच्चे के उत्साह-उमंग की आवश्यकता है। शिक्षक चंदन कुमार दास ने अमृत की पूजा-अर्चना की बात सुनकर बच्चों को पुरस्कारों के लिए पच्चीस कांपी और पच्चीस कलम के साथ पूजा स्थल पर पहुँचकर बच्चों को सम्मानित किया। इस पूजा अर्चना के बाद निम्न छात्र छात्राओं को एक कांपी और एक कलम दिया गया! 1. रोशनी कुमारी वर्ग 9, 2. सपना कुमारी वर्ग 9, 3. आदित्य कुमार वर्ग 8. 4. अमित कुमार वर्ग 4, सिद्धार्थ कुमार वर्ग 9. अंकित कुमार वर्ग 7, मोहित कुमार वर्ग 6, शिवम कुमार वर्ग 9, लवकुश कुमार वर्ग 9, विक्रम कुमार वर्ग 11, अंकुश कुमार वर्ग 4, मोहित कुमार वर्ग 6, शनि कुमार वर्ग 9, अमित कुमार वर्ग 3, मोहित कुमार वर्ग 3, निशांत कुमार वर्ग 11, बबन भगत के साथ अन्य वर्गों के बच्चों को इस पावन अवसर पर सम्मानित किया गया।


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