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बच्चे किलकारी बाल केंद्र में हुनर सीखकर नाम रौशन कर रहे हैं

किलकारी बाल केंद्र में शिक्षा के साथ-साथ उनके हुनर की पहचान कर उसे निखारा जा रहा है

रिपोर्ट 

फूलदेव पटेल 

मुजफ्फरपुर। मुसहरी प्रखंड स्थित राजकीय मध्य  विद्यालय में बिहार बाल भवन किलकारी की ओर से बाल केंद्र में बच्चे अपनी क्षमता को पहचान सकेंगे। इस केंद्र का ज्यादा से ज्यादा लाभ ले रहे हैं। साथ ही विभिन्न कलाओं का प्रशिक्षण भी प्राप्त कर रहे हैं। किलकारी बाल केंद्र की समन्वयक आरती कुमारी ने कहा कि जिस तरह से किलकारी के बच्चे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर परचम लहरा रहे हैं। उसी तरह से रोहुआ के बच्चे किलकारी बाल केंद्र के माध्यम से अपने स्कूल, समाज, राज्य और देश का नाम रोशन कर रहे हैं। 

बच्चे किलकारी बाल केंद्र से हुनर सीखकर नाम रौशन कर रहे हैं

बिहार में हैं किलकारी के 17 केंद्र :

पटना में सात समेत पूरे बिहार में 17 बाल केंद्र हैं। सभी सक्रिय रूप से संचालित हो रहे हैं। आठ से 16 वर्ष के बच्चे किलकारी बाल केंद्र में प्रशिक्षण ले सकते हैं, जो कि पूरी तरह से मुफ्त है। रोहुआ मध्य विद्यालय के प्राध्यापक मोहम्मद सरफराज ने बताया कि बच्चे खेल-खेल में बहुत सारी कलाओं को सीख रहे हैं और सरला श्रीवास सामाजिक सांस्कृतिक शोध संस्थान के संयोजक एवं प्रशिक्षक लोक कलाकार सुनील कुमार ने कहा कि बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए किलकारी बाल केंद्र पर समय-समय पर अलग-अलग विधा का प्रशिक्षण नि:शुल्क प्रदान किया जाता है।

बच्चे किलकारी बाल केंद्र से हुनर सीखकर नाम रौशन कर रहे हैं

आर्ट एंड क्राफ्ट की प्रशिक्षक रश्मि कुमारी ने कहा कि सृजनात्मक गतिविधियों का प्रशिक्षण, कबाड़ से जुगाड़, मधुबनी पेंटिंग, झूमर, वॉल हैंगिंग, चित्रकारी, नृत्य-नाटिका, लोक-संगीत,कैलीग्राफी,लिप्पन आर्ट, मेंहदी ,आत्म रक्षा के लिए जुडो के साथ साथ अन्य विधाओं का प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले बच्चे जिला ,राज्य व राष्ट्रीय स्तर पर परचम लहरा रहे हैं। लोक गायिका अनिता कुमारी कहती हैं कि बच्चें लोक संगीत के बहाने अपनी परंपराओं, विरासत को जानते हैं और मंच पर अपनी सांस्कृतिक प्रस्तुति के माध्यम से जिले का नाम रौशन कर रहे हैं।

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