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बज्जिका लोकगीतों की हस्ताक्षर लोक गायिका अनिता

Phuldev Patel

लीची वाला शहर के रूप में मशहूर मुजफ्फरपुर के मुसहरी प्रखंड की मालीघाट की निवासी लोक गायिका अनिता जिला, राज्य व राष्ट्रीय स्तर के मंचों पर सम्मानित हो चुकी हैं। बज्जिका के साथ साथ भोजपुरी,मैथिली एवं जन जागरूकता गीतों के कारण देश समाज में अपना विशिष्ट स्थान बना चुकी हैं। इसका प्रधान श्रेय मुजफ्फरपुर में स्थित स्वर्णिम कला केंद्र की उषा किरण, दिव्या स्मृति, गांव जवार लोक कलाकारों के जनसंगठन के एम०अखलाक०, स्वाधीन दा एवं अपने गुरु मुजफ्फरपुर शहर के चर्चित संगीत शिक्षक पंडित नंदलाल मिश्र, पंडित शिवशंकर मिश्र को देती हुई लोक गायिका अनीता कहती हैं कि कभी देश कला व संस्कृति के लिए बनारस व कोलकाता को देखा करता था और कोलकाता बनारस मुजफ्फरपुर को। 

बज्जिका लोकगीतों की हस्ताक्षर लोक गायिका अनिता

मुजफ्फरपुर के गौरवशाली विरासत जिसमें स्वर कोकिला पद्मश्री विंध्यवासनी देवी, शारदा सिन्हा,वज्जन खां,बृजबाला देवी,पंडित मुनींद्र शुक्ल को अपना आदर्श मानने वाली लोक गायिका अनीता पुरखा पुरनिया को अपने हृदय में सजाए बसाए हुए निरंतर अपने सुमधुर कंठो से मंचो पर गीतों की बरसात करती रहती हैं। मतदाता जागरूकता अभियान,शिक्षा परियोजना,नशा मुक्ति अभियान,महिला अधिकार,बालिका शिक्षा, जल जीवन हरियाली, रबी किसान चौपाल,खरीफ किसान चौपाल, युवा महोत्सव,पटना साहिब महोत्सव,शनिबहार,कला संस्कृति युवा विभाग,कला श्री महापर्व,संग्रहालय सप्ताह, खादी ग्रामोद्योग संघ,सरला श्रीवास सामाजिक सांस्कृतिक शोध संस्थान के मंचो पर अपनी नियमित उपस्थिति द्वारा अपनी खास पहचान बनाई हैं।

बज्जिका लोकगीतों की हस्ताक्षर लोक गायिका अनिता

मंचों के साथ-साथ लोक गायिका अनिता किलकारी बाल केंद्र रोहुआ के बच्चों को विलुप्त होते गीतों का प्रशिक्षण देने के साथ ही लोककला संस्कृति को सहेजने में जुटी हुई हैं। लोक संगीत के क्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन के लिए "उस्ताद बिस्मिल्लाह खां सम्मान" "पुरखा पुरनिया सम्मान" स्त्रीरत्न लोकनायिका सरला श्रीवास सम्मान,किलकारी कला सम्मान,यादव चंद्र पांडेय सम्मान,विंटर कार्निवाल सम्मान,उद्भव लोक कला सम्मान,चंद्रगुप्त मौर्य सम्मान,महाकवि आचार्य जानकीवल्लभ शास्त्री जन्म शताब्दी सेवा वर्ती सम्मान,उत्कृष्ट कला सम्मान,चरखा सम्मान के साथ साथ माननीय कला एवं संस्कृति मंत्री श्री शिवचंद्र राम से वैशाली में सम्मानित हो चुकी हैं।

लोकगीतों की समृद्ध एवं गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ाने के लिए लोकगायिका अनिता ने विंधवासनी देवी लोक कला संस्कृति मंच का गठन कर तिरहुत की लोक कला संस्कृति को सहेज रही हैं। मूकबधिर,दृष्टिहीन बच्चों के बीच उपस्थित रहने वाली लोक गायिका अनीता वर्ष जल संचयन , जल संरक्षण के साथ साथ कठपुतली कला को भी भी आगे बढ़ा रही हैं।

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