फूलदेव पटेल
मुजफ्फरपुर। कर्तव्यनिष्ठ,अदम्य साहस,अटूट लगन वाली डॉक्टर संतावना भारती नारी समाज के लिए आदर्श हैं। डॉक्टर संतावना भारती का मानना हैं कि महिलाओं के साथ होनेवाली ज्यादातर अपराध एवं हिंसा उनके आर्थिक सशक्तीकरण के अभाव में होता है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 1986 के लक्ष्यों के अनुसार वर्ष 1989 में महिला समाख्या कार्यक्रम शुरू किया गया। समानता के लक्ष्य की प्राप्ति हेतु महिलाओं के सशक्तीकरण के लिए शिक्षा के केंद्रीकरण को मान्यता प्रदान की थी।
नवाचारी दृष्टिकोण जिसमें प्रक्रिया पर विशेष ध्यान दिया गया था। शिक्षा को न केवल साक्षरता कौशल प्राप्त करने के माध्यम के रूप में माना गया है अपितु इसे प्रश्न पूछने, मुद्दों और समस्याओं का विशेष रूप से विश्लेषण करने तथा समाधान करने की प्रक्रिया के रूप में माना गया है। इसके तहत महिलाओं के लिए ऐसा वातावरण तैयार करने का प्रयास किया जाता है जिसमें महिलाएं स्वयं अपनी ओर से अध्ययन कर सकें, अपनी प्राथमिकताएं निर्धारित कर सके और अपनी पसंद के अनुसार ज्ञान तथा सूचना प्राप्त कर सकें। महिलाओं में अपनी अवधारणा में परिवर्तन लाने तथा महिलाओं की 'परम्परागत भूमिकाओं' के सम्बन्ध में समाज की अवधारणा में परिवर्तन लाने का प्रयास किया गया है।
यह अनिवार्य रूप से महिलाओं विशेष रूप से सामाजिक और आर्थिक रूप से लाभवंचित तथा अन्य कमजोर वर्गों की महिलाओं को सक्षम बनाना है ताकि वे अलगाव और आत्मविश्वास की कमी, कठोर सामाजिक प्रथाओं जिन्हें उनके अध्ययन में शामिल किया गया है, का समाधान कर सकें, अस्तित्व के लिए संघर्ष कर सकें।
सरला श्रीवास सामाजिक सांस्कृतिक शोध संस्थान के संयोजक लोक कलाकार सुनील कुमार ने बताया कि महिला साक्षरता में पिछड़े मुजफ्फरपुर जिले के गांव-गांव में दौरा कर महिलाओं में ज्ञान का दीप जलाने और उन्हें अपने अधिकारों के लिए सचेत करने वाली डॉक्टर संतावना भारती ने छोटी बच्चियों, किशोरी एवं विवाहित/अविवाहित बच्चियों को बाल जगजगी एवं महिला शिक्षण केंद्र में नामांकित कराकर जीवन जीने के अनेक हुनर सिखाएं।
अर्थशास्त्र से पी एच डी एवं लॉ से ग्रेजुएट ,ग्रामीण क्षेत्रों में प्रबंधन की डिग्री ,महिला सशक्तिकरण में डिप्लोमा डिग्री , कंप्यूटर में डिप्लोमा,बिहार के तीन जिलों में महिला स्वास्थ्य एवं आर्थिक सशक्तिकरण पर रिसर्च (नीदरलैंड के प्रोफेसर बेंडी जोहांस) करनेवाली डॉक्टर संतावना भारती बिहार के चौदह जिला में ग्रामीण महिलाओं और छह जिला के शहरी मालिन बस्तियों में किशोरियों एवं महिलाओं के जीवन को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दी हैं।
वर्तमान में तथागत एजुकेशनल डेवलपमेंट फाउंडेशन एवं नंदिनी गारमेंट द्वारा देश समाज के विकास में अपना विशिष्ट योगदान दे रही हैं।



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