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आजादी लाने की खातिर कितनी ही माँओ ने खोए थे अपने लाल!

आजादी तो लाई उन्होंने पर   दिया साथ ही सिर का बलिदान  मुस्कुराते हुए चढ़ गए सूली पर  दिया ना कभी खुद को आराम...  बनाएं सैकड़ो नियम उन्होंने   बचाने को राष्ट्र का नाम...  बातें बीती मौसम गुजरें    गुजर गया उनका वो काल...

प्राची  राजपूत

आजादी तो लाई उन्होंने पर 

दिया साथ ही सिर का बलिदान

मुस्कुराते हुए चढ़ गए सूली पर

दिया ना कभी खुद को आराम...

बनाएं सैकड़ो नियम उन्होंने 

बचाने को राष्ट्र का नाम...

बातें बीती मौसम गुजरें  

गुजर गया उनका वो काल...

उन्हीं के राहों पर चलकर के

बन गया मेरा देश महान !

समय का पहिया ऐसा घूमा ,

टूटने लगे वो नियम बार-बार. ..

हाथ में  हाथ रखे बैठे दिखने लगे रक्षक और भक्षक 

एक थाल में  खाते मांस,

सालों लगे थे जिनको बनाने में,

एक पल में  दिया सब  व्यवस्था बिगाड़!

भूला दिया गया उन माँओ के लाल को 

भूल गए लोग वो साल 

आजादी लाने की खातिर कितनी ही माँओ ने खोए थे अपने लाल!

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