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जनजातियों के बेहतर जीवन के लिए अहम है घर में जैविक पोषण बगीचा

विकास 
परसराम मेश्राम

दक्षिणी राजस्थान में आदिवासी समुदायों के लगभग 2547 परिवारों को देखा और पाया कि घरेलू उद्यान ग्रामीण कृषक समुदायों में खाद्य सुरक्षा, आहार की गुणवत्ता और आय में सुधार कर सकते हैं कमजोर माने जाने वाली जनजातियों के बेहतर जीवन के लिए अहम है जैविक पोषण घर में बगीचा जिसमें सब्ज़ियां, अनाज और फल आदि हैं घर में बगीचा भोजन की आपूर्ति का एक अभिन्न हिस्सा रहा है, जिसका उद्देश्य आहार पैटर्न में बदलाव कर पोषण में सुधार करना है। घरेलू उद्यान बेहतर खाद्य सुरक्षा, पुरुषों और महिलाओं की उच्च आहार गुणवत्ता में योगदान करते हैं।
जनजातियों के बेहतर जीवन के लिए अहम है घर में जैविक पोषण बगीचा

दक्षिणी राजस्थान राज्य की बांसवाडा जिले के जंगली पहाड़ियां जहां भील आदिवासी समूहों के घर हैं। अध्ययनों से पता चलता है कि छोटे घर के बगीचे जिनमें बाजरा, दालें, ताजे फल और सब्जियां पैदा करके खाद्य असुरक्षा, कुपोषण और गरीबी के खिलाफ मुकाबला करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

भूख के खिलाफ लड़ाई में अहम घर के जैविक पोषण बगीचे

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के आंकड़ों के अनुसार, 2020 में, दुनिया भर में 82.8 करोड़ लोग भूख से जूझ रहे थे और लगभग 3.1 अरब लोगों को स्वस्थ आहार नहीं मिला। वर्तमान समय में भारत एक मध्यम आय वाला देश होने के बावजूद, यह खाद्य सुरक्षा, कुपोषण तथा महिलाओं और बच्चों में बढ़ते एनीमिया के स्तर से जूझ रहा है।

हाल के वर्षों में, इस बारे में काफी अध्ययन किए गए, कि कैसे घर के बगीचे जो, जैसा कि नाम से पता चलता है, फल, सब्जियां या अनाज घरेलू स्तर पर उगाए जाने के लिए अहम हैं, भूख से मुकाबला करने में मदद कर सकते हैं। लेकिन खाद्य सुरक्षा, आहार गुणवत्ता और आय पर उनके असर को लेकर इसका दायरा सीमित हैं।
जनजातियों के बेहतर जीवन के लिए अहम है घर में जैविक पोषण बगीचा

घर के जैविक पोषण बगीचे में आदिवासी समुदायों के लगभग 2547 परिवारों को देखा। घर के जैविक पोषण बगीचे इस बात के ठोस सबूत सामने आए कि घरेलू उद्यान इन ग्रामीण कृषक समुदायों में खाद्य सुरक्षा, आहार की गुणवत्ता और आय में सुधार कर सकते हैं।

बेहतर खाद्य सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं घर के बगीचे

वागधरा के स्वराज विशेषज्ञ परमेश पाटीदार कहते है की, हमारे निष्कर्ष यह भी सुझाव देते हैं कि घर में बगीचा एक संसाधन के रूप में गरीब किसानों और कमजोर जनसंख्या समूहों के लिए गरीबी कम करने की रणनीति हो सकती है। इससे घरेलू उद्यानों को अपनाने वालों के बीच खाद्य सुरक्षा के बढ़ने की संभावना अधिक होती है। और घर में बगीचा होने से मासिक प्रति व्यक्ति आय में 46 फीसदी की वृद्धि हुई और गरीबी के प्रसार में 12.8 प्रतिशत की कमी आई।

घर में जैविक बगीचों का उज्ज्वल भविष्य
वागधरा के कृषि एवम पोषण विशेषज्ञ पी .एल .पटेल ने कहा, घर में जैविक पोषण बगीचा होने से वार्षिक घरेलू उत्पादन में लगभग 90 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई है। गृह उद्यान पोषण में सुधार के लिए राष्ट्रीय पोषण मिशन जैसे सरकारी कार्यक्रमों के लिए भी अहम हो सकते हैं और सतत विकास लक्ष्यों की उपलब्धि में भी योगदान दे सकते हैं, विशेष रूप से गरीबी, शून्य भूख और अच्छे स्वास्थ्य और कल्याण से संबंधित लक्ष्यों को लेकर भी अहम है। घर के जैविक पोषण बगीचों को बढ़ावा देने से महिलाओं में एनीमिया जैसी व्यापक कुपोषण की समस्याओं पर अंकुश लगाने में मदद मिल सकती है। आहार की गुणवत्ता में सुधार करके जो आम तौर पर इनमें कम विविधता होती है। अनाज का उपयोग अधिक किया जाता है वागधारा के सच्ची खेती के तहत इन जनानातीय समुदाय में फलों और सब्जियों का सेवन घर में जैविक पोषण बगीचा होने से बड़ा है .

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