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चैकले मांदी: बस्तर में शांति के लिए अनोखी पहल

रिपोर्ट 

सुनील कुमार 

कोंडागांव के गोंडवाना भवन में हुई शांति बैठक। सरला श्रीवास सामाजिक सांस्कृतिक शोध संस्थान के संयोजक लोक कलाकार सुनील कुमार ने बताया कि स्थानीय गोंडी भाषा के शब्द चैकले मांदी का अर्थ है सुख शांति के लिए बैठक। इन बैठकों में नई शांति प्रक्रिया से जुड़े लोग स्थानीय लोगों से उनके सुख दुःख के बारे में चर्चा कर रहे हैं। वे शांति के गीत गाते हैं, नाटक कर रहे हैं और उनको यह भी बता रहे हैं कि दुनिया के और हिस्सों में शांति  कैसे आई।

चैकले मांदी: बस्तर में शांति के लिए अनोखी पहल

बस्तर में 40 से अधिक सालों से चल रही हिंसा की समस्या का हल निकालने के लिए यह एक अभूतपूर्व समय है।बेकार की हिंसा बंद हो और बस्तर की जनता चैन की साँस ले सके। इस अशांति को लेकर ऐसा लगता है कि यहाँ भी चुप्पी तोड़ने का समय है। शांति बैठक में पांच राज्यों के प्रमुख साथी सामाजिक कार्यकर्ता शुभ्रांशु चौधरी( रायपुर )छत्तीसगढ़, मुजफ्फरपुर बिहार के लोक कलाकार सुनील कुमार, राजमन नेताम कोंडागांव, शंकर सिंह मरावी,रूपलाल मरावी सूरजपुर छत्तीसगढ़, राजकुमारी कोर्राम, कांकेर,तेसिला नेताम कोंडागांव मध्यप्रदेश के नंदू उईके, सोनू इवने, महेंद्र, शिव प्रसाद (हरदा) महेंद्र, कुम्हरे (चंद्रपुर)महाराष्ट्र, माडवी मुड़े अल्लुरी सीता रामा राज,आंध्रप्रदेश, अजय मडकाम,रश्मिता माड़ी मलकानगिरी ओड़ीसा आदि मौजूद थे। 

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