सामुदायिक सौर सिंचाई प्रणाली अपनाकर किसान खुशहाल

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सामुदायिक सौर सिंचाई प्रणाली अपनाकर किसान खुशहाल


राजस्थान में वागधारा गठित कृषि एवं आदिवासी स्वराज संगठन के प्रयासों से एक सामुदायिक सौर सिंचाई पहल किसानों की आय बढ़ा रही है और किसानों को तनाव मुक्त जीवन जीने में मदद कर रही  है। 

Vikas Meshram

vikasmeshram04@gmail.com
कृषि में वितरित नवीकरणीय ऊर्जा समाधान पेश करना एक क्रांतिकारी विचार है जो कृषक समुदायों को स्थायी रूप से बदल सकता है। ऐसा एक हस्तक्षेप राजस्थान के बाँसवाडा जिले के तहसील कुशलगड गाव आमलीपाडा में दिखाई देता है। जहां वागधारा गठित कृषि एव आदिवासी स्वराज सगठन ने एक सामुदायिक सौर सिंचाई मॉडल स्वच्छ परियोजना विभाग बांसवाडा के साथ पैरवी करके कृषि एव आदिवासी स्वराज सगठन ने अच्छा उदाहरण पेश किया है। वागधारा गठित कृषि एव आदिवासी स्वराज सगठन ने स्थानीय विधायक रमिला खड़िया जी के साथ मिलकर पैरवी की और स्वच्छ परियोजना विभाग से यह किसानों को 40 -हॉर्सपावर (एचपी) सौर पंप और 120 सौरप्लेट से लैस करके समुदाय की बिजली संबंधी चुनौतियों का समाधान किया है । इस पंप का उपयोग सुबह 7 बजे से शाम 5 बजे तक किया जा सकता है। 22 °C के न्यूनतम तापमान पर, और इसमें 200 बीघा कृषि क्षेत्र में आसानी से सिंचाई युक्त हुआ है । एक सामुदायिक सौर सिंचाई मॉडल स्वच्छ परियोजना से 35 आमलीपाडा गाव परिवार लाभान्वित हुए है। 
सामुदायिक सौर सिंचाई प्रणाली अपनाकर किसान खुशहाल

कृषि एव आदिवासी स्वराज सगठन के सतत प्रयास कर स्थानीय विधायक रमिला खड़िया जी ने 4200000 लाख की राशी आवंटित करवाके सौर लिफ्ट पंप सिचाई शुरू किए गइ । आदिवासी परिवारों वाला आमली पाडा गाँव , जिनमें से अधिकांश आर्थिक और सामाजिक रूप से वंचित हैं। इसने वर्ष 2023 में गाव के में 35 परिवार लाभान्वित हुए और करीब 200 बीगा कृषि जमीन में सिचाई में आयी है सौर लिफ्ट सिंचाई प्रणाली, बारमाह के खेतों में पानी की नियमित और विश्वसनीय आपूर्ति प्रदान करती है, जिससे किसानों की फसल की पैदावार और आय में वृद्धि हुई है। लिफ्ट सौर पैनलों पर संचालित होती हैं जो खेतों के हिरण नदी पर ही बनाई गई हैं। इसमें बहुत सारा समय और प्रयास बचाया गया है। पंप पारिस्थितिक रूप से टिकाऊ, परिचालन में सरल और प्रभावी और रखरखाव में आसान हैं।और वागधारा द्वारा इन संगठन के पदाधिकारी का क्षमता निर्माण किया गया ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि वे सौर ऊर्जा संचालित जल प्रणाली के रखरखाव और संचालन करने में सक्षम हैं। वागधारा की तकनीकी टीम गुणवत्ता वाले बीज, बाड़ लगाने की सामग्री और क्षमता निर्माण के तरीकों और खेती की प्रथाओं की समग्र उत्पादकता बढ़ाने के बारे में भी जानकारी प्रदान करती है।आमली पाडा नाम के आदिवासी गाव में कृषि एवं आदिवासी स्वराज संगठन के हस्तक्षेप से किसानों की परेशानियां दूर हो रही हैं। वर्षा आधारित कृषि पर उनकी निर्भरता को कम करने और उनकी वित्तीय सुरक्षा को बढ़ाकर, यह पहल पूरे क्षेत्र में समृद्धि का बीजारोपण कर रही है।

आमली पाडा गाव के निवासी श्री दलु डामोर कहते है की हमारे खेतो में सौर सिंचाई प्रणाली को अपनाने से का परिवार मानसून की बारिश पर निर्भर रहना बंद कर सका और उनकी कुल आय में उल्लेखनीय सुधार हुआ है ।पांच बीघा खेत वाले श्री दलु कहते है की खेत से होने वाली आय से उनके पूरे परिवार का भरण-पोषण होता है, जिसमें उनकी पत्नी, बेटा, बहू और दो पोते-पोतियां शामिल हैं। गाव की काली मिट्टी असाधारण रूप से समृद्ध है और मक्का ,कपास और सब्जियां उगाने के लिए उपजाऊ आदर्श है।

कृषि एवं आदिवासी स्वराज संगठन के सदस्य श्री प्रकाश डामोर कहते है की वागधारा स्थानीय सहजकर्ता कलसिग डामोर ने सामुदायिक सौर सिंचाई मॉडल के बारे में बताया और हमारे संगठन में इसके बारे में चर्चा करवाई और सामुदायिक सौर सिंचाई मॉडल के फायदे बताएं और कहा की यह प्रणाली प्रतिदिन 10 से 12 घंटे सिंचाई पानी सुनिश्चित कर सकती है और रखरखाव की लागत भी कम है। सामुदायिक सौर सिंचाई मॉडल स्थापित होने के तुरंत बाद, श्री प्रकाश डामोर ने विभिन्न प्रकार की सब्जियों की खेती शुरू कर दी। और उनका पूरा परिवार खेती में शामिल है। 

इसी गांव के श्री चोखा डामोर कहते की सामुदायिक सौर सिंचाई मॉडल स्थापित होने कोई अतिरिक्त श्रम खर्च नहीं करना पड़ा। इससे भी अच्छी बात यह है कि नई प्रणाली स्थापित करने के बाद उनकी जल संबंधी लागत में भारी गिरावट आई। वह कहते हैं, ''हमारा सिंचाई खर्च पहले से कम हो गया है।''मार्च और जून 2022 के बीच, परिवार ने तरबूज, ककड़ी, भिंडी और ग्वार फली जैसी सब्जियां और धनिया, पालक, मेथी और जैसी हरी पत्तेदार सब्जियां उगाईं। उन्होंने केवल चार महीनों में 42500 रुपये का शुद्ध लाभ कमाया।जबकि गांव के अन्य किसान अभी भी बारिश का इंतज़ार कर रहे थे, श्री चोखा डामोर के परिवार ने कपास की बुआई पूरी कर ली, क्योंकि उन्हें अपने सौर पंप की बदौलत सिंचाई के पानी का उपलब्ध था। इससे यह सुनिश्चित हुआ कि उनकी कपास की फसल कीट और बीमारी के हमलों से सुरक्षित थी, जो आमतौर पर देर से बुआई के कारण होती है। समय पर फसल बोने से उन्हें अच्छी पैदावार और बेहतर कीमत की भी गारंटी मिलती है। 

वागधारा सस्था के हिरण इकाई संगठन लीड एवं एडवकेशी प्रबंधक सोहन नाथ योगी कहते है की संगठन के माध्यम से "हमारा लक्ष्य इन सीमांत किसानों को सूखे और बाढ़ की स्थिति में सिंचाई के वैकल्पिक स्रोतों तक पहुंचने में मदद करना और उनके लिए स्थायी टिकाऊ आजीविका का समर्थन करना है।"
(नोट : आलेख में दी गयी सामग्रियों के लिए लेखक जिम्मेवार  हैं । )
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