ग्राम स्वराज समूह ने मनरेगा से रुकवाया पलायन

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ग्राम स्वराज समूह ने मनरेगा से रुकवाया पलायन

विकास मेश्राम 

वाग्धारा 

vikasmeshram04@gmail.com

मेहनतकश लोग सही राह और संसाधनों का संबल पाकर संपन्नता की कहानी गढ़ लेते हैं। इसका उदाहरण है बांसवाड़ा जिले के 50 किलोमीटर दूर गांव रघुनाथ सिंह का गढ़ा जो की संपूर्ण रूप से जनजातीय बाहुल्य क्षेत्र है। यहां के अधिकतर परिवार अपनी आजीविका चलाने के लिए खेती-बाड़ी एवं मजदूरी पर निर्भर रहते है। इस क्षेत्र के गाव में ज्यादा तर सीमांत किसान है वह किसान खेती बाड़ी से अपनी आजीविका चलाते है, लेकिन इन परिवारों के पास खेती-बाड़ी के लिए पर्याप्त जमीन एवं पानी की व्यवस्था नहीं है वे सभी परिवार मजदूरी कर अपनी आजीविका को सुदृढ़ करने के लिए निर्भर रहते हैं। इस गांव के अधिकतर लोगों को मजदूरी की अधिक आवश्यकता रहती है, इसके बावजूद भी यहां पर पिछले 1 साल से सरकार द्वारा संचालित नरेगा कार्यक्रम नहीं चल रहा था मजबूरन गाँव वासियों को अपने निकटतम गुजरात राज्य जाकर पलायन करके मजदूरी करनी पड़ रही थी । ग्राम वासियों ने कई बार ग्राम पंचायत में जाकर प्रयास किया लेकिन हर बार उनको निराश होना पड़ा। ग्राम वासियों का मानना था की अगर नरेगा में रोजगार मिल जाता तो गाँव के लोग बाहर राज्यों में पलायन नही करते या मजदूरी पर कम जाते और गाँव में ही रोजगार मिल जाता लेकिन नरेगा कार्य सुचारू रूप से चलने के कोई आसार नजर नहीं आ रहा था ।

ग्राम स्वराज समूह ने मनरेगा से रुकवाया पलायन

इसी संदर्भ में वागधारा संस्था गठित ग्राम स्वराज समूह का गठन किया गया है जो कि ग्राम स्तर पर केंद्रीय संगठन के रूप में कार्य करता है । धरातलीय व स्वतंत्र कार्यशैली से कार्य करने वाला यह समूह रघुनाथ सिंह का गढ़ा गांव के पूरे समुदाय का प्रतिनिधित्व कर रहा है। ग्राम स्वराज समूह, गाँव में सामाजिक और आर्थिक न्याय के लिए और सामुदायिक एकता को बढ़ाने के लिए जैसे- गाँव के विकास के मुद्दों, समुदाय में फैली विभिन्न कुरीतियों को ख़त्म करने के लिए समुदाय में जन जागरूकता लाने, समस्याओं को हल करने के लिए विभिन्न हितधारकों के साथ संवाद स्थापित करने, ग्राम विकास की योजनाओं के निर्माण में सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित करने तथा पंचायत में अनुमोदन करने का कार्य, समुदाय के वंचित वर्ग के सदस्यों को चिन्हित कर उन्हें समाज की मुख्यधारा में लाने के लिए सरकार द्वारा प्रदत्त विभिन्न सेवाओं एवं योजनाओं से जुड़वाने में सहयोग हेतु सतत प्रयास रत है इस ग्राम स्वराज समूह में प्रत्येक गाँव से 10 पुरुष और 10 महिलाओं की समान सहभागिता के साथ कुल 20 सदस्य होते है समूह में सम्मिलित होने वाली 10 महिला सदस्य अनिवार्य रूप से उनकी भागीदारी आवशक होती है Iयह समूह के सदस्य प्रति माह नियमित बैठक करते है । ग्राम स्वराज समूह के सभी सदस्य ग्राम चौपाल के माध्यम से गाँव के समग्र विकास और स्वराज की अवधारणा को लागू करने के लिए कार्य करते है ।
ग्राम स्वराज समूह ने मनरेगा से रुकवाया पलायन

ईशी ग्राम स्वराज संगठन के सदस्य गौतम लाल बरगोट,बापू लाल भुज मीरा देवी ने रघु नाथ सिंह गडा पंचायत में जाकर सचिव और सरपंच से संपर्क किया लेकिन गाँव में किसी प्रकार का कार्य स्वीकृत नहीं हो रहा था I कई बार पंचायत में संपर्क कर सरपंच एवं ग्राम विकास अधिकारी को नरेगा कार्य संचालन करने के बारे में बात की लेकिन कोई हल नहीं निकल पाया तो ग्राम स्वराज समूह के सदस्य गौतम लाल ने मन में ठान लिया की गांव वासियों के साथ एक बैठक कर निश्चय किया जाएगा की किस तरह से मनरेगा की साइट को शुरू किया जाए और गाव में बैठक ली और इस बैठक के बाद ये निर्णय लिया गया की हर फले से 10-10 लोगों का एक समूह बनाकर आवेदन करवाएंगे ताकि अधिक से अधिक आवेदन हो सके । गौतम लाल ने अपने साथियों से इसी प्रक्रिया के तहत गांव के लोगों के फॉर्म भर कर ग्राम पंचायत में जमा करवाएं। इसके बाद यह प्रयास सफल रहा और ग्राम पंचायत की ओर से 59 लोगों की मिस्टोल जारी करवाई गई जिसमें 46 महिलाएं एवं 13 पुरुष। इस मिस्टोल के तहत गांव में मेड़बंदी एवं भूमि सुदृढ़ीकरण का काम शुरू हुआ।
इस पर ग्राम स्वराज समूह की सदस्या मीरा देवी कहती है की सभी 59 सदस्यों को प्रतिदिन ₹220 के हिसाब से मानदेय मिलना शुरू हुआ और 100 दिन का रोजगार मिला यह रोजगार हमारे गांव का पलायन रोकने के लिए मददगार साबित हुआ । मेड़बंदी एवं भूमि सुदृढ़ीकरण के लिए 2.42000 /- रुपये की राशी आवंटित हुए इस प्रयास के लिए गांव के सभी लोग सराहना करते हैं साथ ही सूची में शामिल 59 सदस्य कहते हैं कि गौतम लाल के प्रयास से आज हमें रोजगार प्राप्त हुआ। गौतम लाल का कहना है मनरेगा के अंतर्गत आजीविका संवर्धन के लिए निर्मित आजीविका सृजन और संवर्धन होने से गाव के लोगो के जीवन में तेजी से बदलाव आ रहा है आर्थिक संसाधन प्राप्त हुए है, उससे वे मौजूदा हालात में काफी राहत महसूस कर रहें हैं। । मनरेगा के श्रमिकों को भी आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बना रहा हैं। इस तरह का प्रयास आगे भी जारी रखूंगा ताकि गांव के लोगों को समय-समय पर रोजगार मिल सके।
(नोट : इस आलेख में दी गयी सामग्री के लिए लेखक उत्तरदायी है। )
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