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आंगन की कलियां

 दीक्षा बोरा

गरुड़, उत्तराखंड

चाहे फूलों से कितनी भी महक क्यों न आती हो,
एक मीठी सी मुस्कान है बेटी,
बेटी खुद को दिया वो तोहफा है,
जो सौभाग्य से पैदा होती है,
जो मां की परछाई और पिता का ख्वाब होती है,
खिलती हुई कलियाँ है बेटियां,
जो जिंदगी की असली महक होती है,
मां बाप के आह पर रोती है,
इस दुनिया में सबसे प्यारी एक बेटी होती है।।


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