30 किसान परिवार के 100 बीघा कृषि भूमि को हुआ फायदा.
राजस्थान। वागधारा गठित कृषि एवं आदिवासी स्वराज संगठन समुदाय आधारित संगठन है जो समुदाय के लोगों द्वारा बनाया गया है। अपने कृषि एवं आदिवासी स्वराज संगठन पोटलिया के उद्देश्य एवं कार्य को विशद करते हुए अध्यक्ष चिमनलाल डामोर बताते है कि यह संगठन चालीस गावो का प्रतिनिधित्व करता है और हर सदस्य अपने अपने क्षेत्र के सभी वंचित परिवारों के साथ मिलकर जनकल्याणकारी कार्यो को करना एवं करवाना। स्थानीय स्तर पर लोगों की समस्याओं के समाधान के लिए समुदाय के सहयोग से समाधान करना एवं करवाना साथ ही पैरवी सबंधी समस्त कार्य समुदाय के हित के लिए कार्य करता है।
यह संगठन स्थानीय लोगों के द्वारा निर्वाचित सदस्यों से मिलकर बनाया गया है और इसमें संगठन की कार्यकारिणी में कम से कम 20 सदस्य होते हैं और महिला एवं पुरुष की भागीदारी समान रूप से आवश्यक है जिसमें 20 सदस्यों में से 10सदस्य पुरुष व 10सदस्य महिला होनी चाहिए। संगठन के माध्यम से लोगों को नेतृत्व प्रदान करना और समुदाय को विकास एवं स्वराज की अवधारणा व्यापक रूप से स्थापित करने हेतु प्रयासरत करना और आगे अपनी भुमिका बताते हुए चिमनलाल डामोर कहते हैं कि अध्यक्ष सरपंच, वार्ड-पंच, सचिव और अन्य सरकारी अधिकारियों के साथ संपर्क शक्ति बढाना।
उपाध्यक्ष, सचिव और अन्य सदस्यों के साथ मिलकर समस्या समाधान के लिए ग्राम पंचायत को आवेदन पत्र सौंपना। सरपंचों से मिलने और लाभार्थियों के बारे में उन्हें याद दिलाने के लिए बार-बार ग्राम पंचायत ब्लॉक का दौरा करना । एक नेतृत्वकर्ता के रूप में सदैव संगठन के समस्त नियमो का स्वयं पालन करना एवं अन्यो को पालना करवाना I एक नेतृत्वकर्ता के रूप में सदैव समुदाय एवं अपने संगठन के सदस्यों को सहयोग प्रदान करना। ग्राम स्तरीय विकास कार्यक्रमों में भागीदारी एवं उनके बारे में समुदाय में जानकारी पहुंचना, ज्ञापन लिखना लिखवाना ग्राम स्तरीय विकास कार्यक्रमों में भागीदारी एवं उनके बारे में समुदाय में जानकारी पहुचाना समुदाय को सरकारी योजनाओ के बारे में जागरूक करना एवं उनको योजनाओ का लाभ दिलवाना।
वागधारा गठित कृषि एवं आदिवासी स्वराज संगठन पोटलिया के सदस्या सोमली बेन देवदा अपने कार्य के बारे में कहती हैं की ग्राम स्तरीय विकास कार्यक्रमों में भागीदारी एवं उनके बारे में समुदाय में जकारी पहुँचाना |समुदाय को सरकारी योजनाओ के बारे में जागरूक करना एवं उनको योजनाओ का लाभ दिलवाना Iअपने क्षैत्र के समस्त समुदाय आधारित संगठनो के बारे में जानकारी एकत्रित करना एवं उनकी तय बैठकों में भागीदारी सुनिश्चित करना। अपने क्षैत्र के समस्त सरकारी संस्थाओ के द्वारा समुदाय को उपलब्ध होने वाली सुविधाओ की समय-समय पर निगरानी कर उनके सफल संचालन के लिए कार्य करना जैसे आंगनवाडी, विधालय , स्वास्थ्य केंद्र आदि इसी के साथ हमारा कृषि एवं आदिवासी स्वराज संगठन सामूहिक प्रयासों से महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (महात्मा गांधी नरेगा) ने मजदूरों और किसानों की जिंदगी के अलावा गाँव के प्राकृतिक संसाधनों के प्रबंधन को भी बेहतर बनाया है।
पहले बरसात के मौसम में ही बहता दिखाई देने वाला चेक डेम , अब जल संवर्धन के कार्यों से बारिश के पहले और बाद में भी जीवंत दिखाई दे रहा है। बाँसवाड़ा जिले के देवदासाथ गाँव में महात्मा गांधी नरेगा से चेक डेम का निर्माण पंचायत ने करवाया है । और अब , यहाँ रुके पानी से आस-पास की जमीन हरी-भरी हो गई। गाँव के लगभग 30 किसान परिवार किसानों ने नाले से लगे अपने खेतों में मक्का , धान के अलावा सब्जियों का भरपूर उत्पादन लिया, इससे उन्हें अच्छी-खासी आमदनी हुई। इस प्रकार चेक डेम ने किसानों की जिन्दगी को खुशहाल बना दिया है।
जिले के कुशलगढ़ की देवदासाथ ग्राम पंचायत में दिखाई दे रही इस हरियाली और खुशहाली के पीछे पंचायत की सोच और ग्रामीणों की मेहनत है। पंचायत ने साल 2022 -23 में इस गाँव में बहने वाले नाले में भूमि क्षरण को रोकने एवं संग्रहित जल के जरिये भू-जल भंडारण के उद्देश्य से महात्मा गांधी नरेगा के तहत जल संवर्धन का कार्य कराया था। इसके अंतर्गत 8,00000 लाख रुपये की लागत से चेक डेम का निर्माण कराया गया। यहाँ 35 महिलाओं और 45 पुरुषों को मिलाकर, कुल 80 ग्रामीणों को 218 मानव दिवस का रोजगार महात्मा गांधी नरेगा से मिला इससे इन परिवारों का पलायन रुक गया ।
देवदासाथ ग्राम पंचायत के सरपंच श्रीमती दरर्मिला देवदा हैं कि गाँव के में महात्मा गांधी नरेगा योजना से हुए इस जल संवर्धन के काम ने बड़ा असर डाला है। इसमें 36 ग्रामीण परिवारों को सीधे रोजगार मिला। चेक डैम बनाने से नाले में अधिक समय तक पानी रुका, जिसका उपयोग नाले से लगी कृषि भूमि के किसानों ने अपनी खेती-बाड़ी में किया। इस कार्य से गाँव 30 किसान परिवारों की लगभग 100 बीघा कृषि भूमि सिंचित हुई है।
वागधारा गठित कृषि एवं आदिवासी स्वराज संगठन के सदस्य श्री मांगीलाल घडिया आगे बताते हैं कि चेक डेम बनने से पानी रुका और यह पानी हमारे खेती एवं पशुओं के लिए पानी उपलब्ध हो गया और भू-जल भंडारण में वृद्धि हुई है। इसका प्रभाव नाले से लगे किसानों की खेती-जमीन में खुदे नल कूपों में साफ देखा जा सकता है। चेक डेम बनने के पूर्व मई-जून महीने में इन नलकूप में जल स्तर 400 से 500 फीट नीचे चला जाता था, जो आज 150 से 250 फुट पर आ गया है। भू-जल स्तर बढ़ने से आस-पास हरियाली भी बढ़ गई है।
चेक डेम में हुये जल संवर्धन के कार्य से लाभान्वित किसान और वागधारा गठित कृषि एव आदिवासी स्वराज सगठन सदस्य श्री शंकर लाल देवदा बताते हैं कि कृषि एवं आदिवासी स्वराज संगठन पोटलिया के विगत 2 वर्षों से संगठन के सक्रिय सदस्य श्री शंकर लाल जी ने अपने गांव में पलायन को रोकने हेतु ग्राम स्तर की बैठक कर पलायन की समस्या ग्राम वासियों के सामने रखी तथा बैठक में सरपंच को भी आमंत्रित किया गया जिसमें किस क्षेत्र मे पलायन से परिवार में अन्य कई समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है इस हेतु सरपंच एवं ग्राम वासियों के सामने समस्या रखी जिसमें सरपंच को को एक ऐसा कार्य स्वीकृत करवाने की प्रस्ताव रखा जिससे लोगों को रोजगार मिले एवं पलायन नहीं करें तभी श्री शंकर लाल जी ने एक सामूहिक चेक डैम बनाने का प्रस्ताव रखा जो तुरंत ग्राम सभा के रजिस्टर में चढ़ा कर उसको पंचायत समिति स्वीकृति हेतु भेजा गया इसके बाद 15 दिन के अंदर कार्य स्वीकृत होकर उस जगह में वर्तमान में 80 परिवार के 120 लोग कार्यरत है तथा वर्तमान 80 परिवार में से कोई भी परिवार पलायन नहीं है श्री शंकर लाल देवदा गांव में किसी भी प्रकार का लोगों का पलायन नहीं हो उस पर निरंतर कार्य कर रहे हैं।नाले से लेकर उनकी 4 बीघा कृषि भूमि है, जिसमें उन्होंने नाले के पानी से बरबट्टी, बैंगन, करेला, मिर्च और तोरई सब्जियों की पैदावार ली। इन सब्जियों को बेचने से उन्हें लगभग एक लाख रुपये की आमदनी हुई।
श्री शंकर लाल देवदा के खेत के नजदीक श्री प्रमोद देवदा, श्री भीम जी देवदा, श्री जमना देवदा , श्री दिनेश देवदा , श्री कांतिलाल देवदा , श्री पंकज देवदा ,श्री महेश देवदा , श्रीसंजय देवदा,श्री किजा देवदा, भी ऐसे ही किसान हैं, जिन्होंने नाले से लगी अपनी कृषि भूमि पर इस साल सब्जियों का उत्पादन लेकर लाभ कमाया। महात्मा गांधी नरेगा योजना से हुये इस छोटे से कार्य ने किसानों की जिंदगी में खुशियों के बड़े-बड़े पल लाकर, उन्हें खुशहाल बना दिया है।
(नोट : इस लेख/न्यूज़ में दी गयी सामग्री के लिए लेखक उत्तरदायी हैं। )

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