उतरौरा, उत्तराखंड
आज मैंने एक साथ दो तस्वीर देखी,
एक साथ किस्मत की तकदीर देखी,
एक तरफ बादलों को देख कर लोगों की ख़ुशी देखी,
दूसरी तरफ बादलों को देख कर किसी की बेबसी देखी,
बादल तो एक ही है, फिर भावनाएं सबकी अलग क्यों?
व्यक्ति भी एक जैसे फिर कामनाएं सबकी अलग क्यों?
शायद इस क्यों का जवाब भी क्यों में ही है,
इसीलिए तो तक़दीर और तस्वीर सबकी अलग है,
शायद कसूर परिस्थितियों का ही है,
वर्षा की ख़ुशी उनके लिए जिनके घर पक्के हैं,
और बेबसी उनके लिए जिनकी छत कच्ची है,
ख़ुशी उनके लिए जिनका चूल्हा रात में जलेगा,
और बेबसी उनके लिए जिनका चूल्हा पानी में डूबेगा,
बस इतनी बात काफी है इन्हें शब्दों में ढालने के लिए,
यह क्षण काफी हैं इन पंक्तियों को पढ़ने के लिए,
आंखें बंद करो और खुद को रखो उस स्थान पर
फिर फर्क समझ में आये बेबसी और ज्ञान पर.
(चरखा फीचर)
एक साथ किस्मत की तकदीर देखी,
एक तरफ बादलों को देख कर लोगों की ख़ुशी देखी,
दूसरी तरफ बादलों को देख कर किसी की बेबसी देखी,
बादल तो एक ही है, फिर भावनाएं सबकी अलग क्यों?
व्यक्ति भी एक जैसे फिर कामनाएं सबकी अलग क्यों?
शायद इस क्यों का जवाब भी क्यों में ही है,
इसीलिए तो तक़दीर और तस्वीर सबकी अलग है,
शायद कसूर परिस्थितियों का ही है,
वर्षा की ख़ुशी उनके लिए जिनके घर पक्के हैं,
और बेबसी उनके लिए जिनकी छत कच्ची है,
ख़ुशी उनके लिए जिनका चूल्हा रात में जलेगा,
और बेबसी उनके लिए जिनका चूल्हा पानी में डूबेगा,
बस इतनी बात काफी है इन्हें शब्दों में ढालने के लिए,
यह क्षण काफी हैं इन पंक्तियों को पढ़ने के लिए,
आंखें बंद करो और खुद को रखो उस स्थान पर
फिर फर्क समझ में आये बेबसी और ज्ञान पर.
(चरखा फीचर)
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