वर्षा आर्या
उम्र - 13 वर्ष
कपकोट, उत्तराखंड
खुशियों जहान होती हैं बेटियां
सपनों की अरमान हैं बेटियां
एक छोटी से मुस्कान होती हैं बेटियां
धरती पर महान होती हैं बेटियां
फिर क्यों लोग बोझ समझते हैं?
जन्म लेने से क्यों रोकते हैं?
क्या जीने का इन्हें अधिकार भी नहीं?
जिनसे है यह संसार सारा
बस दुनिया में लाकर तो देखो
जीने का बहाना ढूंढ लेंगी
इन्हें एक बार अपना कर तो देखो
खुशियों के ये ख़ज़ाने ढूंढ लेंगी
(चरखा फीचर)
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