आओ सुनाऊं बेटी की कहानी

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आओ सुनाऊं बेटी की कहानी

आओ सुनाऊं बेटी की कहानी

अनीता

कक्षा-10वी
पोलिंग, बागेश्वर
उत्तराखंड


बचपन में अंधेरे से डर लगता था,
पर अब इस दुनिया से डर लगता है,
कि ये हमें आगे बढ़ने से रोक देंगी,
जब जब बेटी ने धरती पर जन्म लिया,
तब तब उन्हें टोका गया,
बदल जाएगी सारी दुनिया,
जब बेटी के प्रति सोच बदलेगी,
कल भी बेटी को दुख देते थे दुनिया वाले,
आज भी बेटी को दुख देते हैं।।

चरखा फीचर
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कहां गए वो दिन

दिव्या धपोला
कक्षा-12वीं
दोफाड़, कपकोट
बागेश्वर, उत्तराखंड


कहां गए वो दिन जब
दादी जी दुकान से चीज़ें लाती थी,
और हम भाई बहन बेसब्री से उनका इंतजार करते थे,
कभी कभी मम्मी की मार से बचने के लिए हम,
दादी जी के कमरे में घुस जाते थे,
और वहां से मां को खूब चिढ़ाते थे,
चलो गांव की ओर अपनी यादो को ताजा करते हैं,
नम हो जाती हैं कभी आंख दादी जी का प्यार,
दादी मां का दुलार याद कर के,
चलो गांव की ओर यादों को ताजा करते हैं,
चलो गांव की ओर अपनी सभयता को बचाते हैं,
चलो गांव की ओर हमसे जितना हो पाए,
वो गांव के लिए करते है।।

चरखा फीचर
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