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स्त्री की प्यारी दुनिया

स्त्री की प्यारी दुनिया

 हर वक्त एक ही सवाल


साक्षी देवरारी
गरुड़, बागेश्वर
उत्तराखंड

हर वक्त एक ही सवाल मन में दौड़ता है,
कैसे कोई पल में अच्छा और बुरा बन जाता है?
बैठे-बैठे यही सोचती हूं, जवाब नही मिल पता है,
जब वह अच्छा बनता है, तो तारीफें करता है,
और जब बुरा बनता है तो बुराइयां करता है,
हर बार अपना अलग रंग दिखलाता है,
उसका रंग देखते-देखते जीवन निकल जाता है,
मगर रंग बदलते-बदलते वह क्यों नहीं थकता है?
उससे कैसे बचा जाए, यह बस हमें ही आता है,
पर तब भी उससे कोई बच नहीं पाता है,
क्या लोग ऐसे ही होते हैं? मन में यही सवाल आता है,
मगर जवाब नहीं मिल पाता है, बस बैठे बैठे दिन निकल जाता है।
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स्त्री की प्यारी दुनिया

कल्पना जोशी
कक्षा-9 ,उम्र-17
गरुड़ , बागेश्वर
उत्तराखंड


स्त्री की प्यारी 
दुनिया,
इतनी न्यारी होगी क्या?
दर्द झेलती दुनिया से सारी,
फिर भी न समझे कोई प्यारा,
समाज से करते इसे हैं दूर,
और फिर करते जीने को मजबूर,
करते ना स्त्री का कोई सम्मान, 
कहते हैं, नहीं है उसका कोई काम,
स्त्री का करोगे अगर तुम अपमान,
नहीं होगा फिर जीवन कोई आसान।
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तुझे भी सब कुछ करना है

दिव्या धपोला
कपकोट, बागेश्वर
उत्तराखंड


बस की तेरे सब कुछ है,
तू क्यों नहीं कुछ करती है?
जानते हुए भी क्यों अनजान बनती है?
मन में तेरे बहुत सारे सपने हैं,
कब तक दबा कर रखेगी इन्हें?
ये दुनिया है बस चलती रहेगी,
तू अपना रास्ता बनाती रहना,
कुछ बड़ा करके दिखाना है,
विफल होने पर भी तुझे नहीं घबराना है,
बस अपने लगन और हौसले से, 
ज़माने को सफल होकर दिखाना है॥
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मुझे भी तो चाहिए आजादी

दीपा लिंगढिया
गरुड़, बागेश्वर
उत्तराखंड


मुझे भी तो चाहिए आजादी
हां, थी मैं अनजान की,
दुनिया ऐसी भी होती है,
बचपन की हर बात याद आती है,
तुम किसी से बात नहीं कर सकती,
लड़की हो, अपनी मर्यादा में रहो,
तुम सिर्फ घर के ही काम करो,
तुम ही घर की इज्जत हो,
अपनी नजरें झुकाकर रखो,
तुम्हें कल पराये घर जाना है, 
हर चीज को तरीके से करो,
क्या नहीं थी मेरी भी कोई जिंदगी?
क्यों बचपन से मुझे रोका गया?
हर एक बात पर टोका गया,
आज हर लड़की को चाहिए आज़ादी,
ख्वाहिश और सपने को पूरा करने की,
वो सपने जो हैं हर लड़की के अपने,
अब मैं ज़रूर लड़ेगी ज़माने से,
नहीं रुकूंगी अधिकारों को पाने से,
तब तक लड़ती रहूंगी ज़माने से

चरखा फीचर

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