आरडीएस काॅलेज के प्रोफेसर व सीनेटर डॉ संजय सुमन ने कहा कि सावित्रीबाई फुले का सपना तभी पूरा होगा, जब समाज के वंचित समुदाय के लोग एवं स्त्रियां पढ़ेंगी।
मुज़फ़्फ़रपुर, कुढ़नी। रविवार को प्रखंड क्षेत्र के रामपुर बलरा चौक स्थित एक सभागार में बौद्धिक वैचारिक हस्तक्षेप का स्वतंत्र मंच 'जागृत' संस्था के बैनर तले माता सावित्रीबाई फुले की 195 वीं जयंती समारोह मनाया गया। कार्यक्रम की शुरुआत में सावित्रीबाई फुले की तस्वीर पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी गयी। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए आरडीएस काॅलेज में इतिहास के प्रोफेसर व सीनेटर डॉ संजय सुमन ने कहा कि सावित्रीबाई फुले का सपना तभी पूरा होगा, जब समाज के वंचित समुदाय के लोग एवं स्त्रियां पढ़ेंगी। शिक्षा हमें सवाल करना सिखाती है, खुद से, सिस्टम से और सत्ता से।
इसलिए हम शिक्षा को बदलाव का हथियार बनाएं। मुख्य वक्ता डॉ संतोष सारंग ने कहा कि सावित्रीबाई फुले आधुनिक भारत की एक ऐसी क्रांतिकारी वीरांगना हैं, जिन्होंने रूढ़िवादी परंपरा एवं धार्मिक पाखंड को चुनौती दी। उन्होंने स्त्रियों व कमजोर वर्ग के लोगों के लिए शिक्षा का द्वार खोल कर उनकी मुक्ति का मार्ग प्रशस्त किया।
बिहार विश्वविद्यालय के हिंदी पीजी डिपार्टमेंट में सहायक प्राध्यापक डॉ सुशांत कुमार ने कहा कि सामाजिक असमानता, अशिक्षा, पाखंड, सांस्कृतिक जड़ता एवं रूढ़ीवादी परम्पराओं को समाज से समाप्त कर समानता, शिक्षा, श्रमण संस्कृति के तत्वों को स्थापित करना सावित्रीबाई फुले का मूल उद्देश्य था। इसके लिए उन्होंने ताउम्र संघर्ष किया। समाजवादी जन परिषद के सदस्य नीरज सिंह ने भी सावित्रीबाई फुले के योगदान को रेखांकित किया।
सीएन कालेज साहेबगंज में सहायक प्राध्यापक डॉ अविनाश कुमार ने धन्यवाद ज्ञापित किया। उन्होंने कहा कि पानी से नहाने पर कपड़े बदलते हैं, लेकिन पसीने से नहाने पर इतिहास बदलते हैं। और सावित्रीबाई फुले ने इतिहास बदलने के लिए पसीने बहाए। मंच संचालन हरिशंकर कुमार सिंह ने किया।
इस मौके पर मुन्ना कुमार, सुनील कुमार, अमरेंद्र कुमार, सोनू पटेल, अंजना कुमारी, श्वेता कुमारी, रूपा कुमारी, बबीता देवी, मनीषा कुमारी, मीना देवी, शांति देवी, दिनकर कुमार, पिंकू बैठा, ललन सहनी, दीप ज्योति, राजीव कुमार, वासुदेव पासवान, मिथिलेश कुमार राम, पंकज कुमार, विक्रम कुमार धर्मेंद्र कुमार आदि मौजूद थे।
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