मुजफ्फरपुर में भूमि अधिग्रहण व मुआवज़े पर जागरूकता कार्यक्रम

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मुजफ्फरपुर में भूमि अधिग्रहण व मुआवज़े पर जागरूकता कार्यक्रम

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Phuldev Patel

मुजफ्फरपुर। जिला विधिक सेवा प्राधिकार (बालसा) मुजफ्फरपुर एवं राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) के संयुक्त तत्वावधान में भूमि अधिग्रहण से संबंधित एक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में राष्ट्रीय राजमार्ग निर्माण के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया, मुआवज़ा, आपत्ति और कानूनी अधिकारों के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई।

मुजफ्फरपुर में भूमि अधिग्रहण व मुआवज़े पर जागरूकता कार्यक्रम

कार्यक्रम का शुभारंभ प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह प्राधिकार अध्यक्ष श्रीमती श्वेता कुमारी सिंह के निर्देश पर दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। दीप प्रज्वलन में मुख्य अतिथि परिवार न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश पियुष प्रभाकर, मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी राज कपूर, अवर न्यायाधीश प्रथम सह अपर मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी पंकज तिवारी, न्यायाधीश चतुर्थ सह अपर दंडाधिकारी पश्चिमी मृत्युंजय कुमार, जिला विधिक सेवा प्राधिकार की सचिव जय श्री कुमारी, अधिवक्ता संघ के महासचिव उमेश प्रसाद सिंह, NHAI के अधिकारी आशुतोष सिन्हा, डिप्टी चीफ राम बाबू सिंह, स्टैंडिंग काउंसिल डॉ. मौर्या विजय चंद तथा विधिक सहायक ऋषभ रंजन सहित अन्य अधिकारियों ने भाग लिया।

मुख्य अतिथि पियुष प्रभाकर ने बताया कि आम लोगों के पास जो भूमि है वह रैयती भूमि होती है, जिस पर वे खेती-बाड़ी करते हैं। लेकिन देश के विकास और राष्ट्रीय राजमार्ग निर्माण के लिए यदि सरकार को उस भूमि की आवश्यकता होती है, तो सरकार उचित मुआवज़ा देकर उसे अधिग्रहित कर सकती है।

जिला विधिक सेवा प्राधिकार की सचिव जय श्री कुमारी ने कहा कि विकास कार्यों के लिए भूमि अधिग्रहण संभव है, परंतु प्रभावित लोगों को न्यायसंगत मुआवज़ा मिलना जरूरी है। अक्सर शिकायत मिलती है कि सरकार केवल जमीन का मूल्य देती है, मकान या संरचना का पूरा मूल्य नहीं मिल पाता, जिसके कारण लोगों को वर्षों तक अदालतों के चक्कर लगाने पड़ते हैं।

मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी राज कपूर ने कहा कि सरकार विकास कार्य जनता की सुविधा के लिए करती है, इसलिए मुआवज़ा प्रक्रिया पारदर्शी और न्यायपूर्ण होनी चाहिए। वहीं पंकज तिवारी ने उपस्थित पैनल अधिवक्ताओं और पीएलवी को निर्देश दिया कि जिन लोगों को मुआवज़े में परेशानी हो, उन्हें उचित कानूनी मार्गदर्शन दिया जाए।

कार्यक्रम में डॉ. मौर्या विजय चंद ने भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया समझाते हुए बताया कि पहले जिला स्तर पर सक्षम पदाधिकारी सर्वे कर मुआवज़े का आकलन करते हैं, फिर राज्य सरकार और उसके बाद केंद्र सरकार द्वारा अंतिम रिपोर्ट तैयार की जाती है। इसके बाद मुआवज़े की राशि जारी होती है और प्रभावित लोगों को आपत्ति दर्ज कराने के लिए तीन सप्ताह का समय दिया जाता है।

यदि किसी व्यक्ति को उचित मुआवज़ा नहीं मिलता है तो वह पहले जिला स्तर के सक्षम पदाधिकारी के समक्ष आवेदन दे सकता है। संतुष्टि न मिलने पर राष्ट्रीय राजमार्ग अधिनियम, 1956 की धारा 34 के तहत जिला न्यायाधीश के समक्ष, फिर उच्च न्यायालय और अंततः सर्वोच्च न्यायालय में अपील कर सकता है। उन्होंने बताया कि देरी की स्थिति में मुआवज़े की राशि पर लगभग 9 प्रतिशत ब्याज भी देय होता है।

प्रश्न-उत्तर सत्र में मुशहरी, गायघाट और मड़वन प्रखंड के लोगों ने उचित मुआवज़ा नहीं मिलने की शिकायतें रखीं। पीएलवी फूलदेव पटेल ने कांटी से पीपरा कोठी तक राष्ट्रीय राजमार्ग निर्माण के दौरान लगभग 44,680 पेड़ों की कटाई से पर्यावरण और प्रदूषण पर पड़ने वाले प्रभाव का मुद्दा भी उठाया।

कार्यक्रम में जिला विधिक सेवा प्राधिकार के अमित कुमार, संजीव कुमार, परवेज आलम, फैयाज़ आलम, शिवनाथ जी, वंदना कुमारी, मुन्ना आलम, बदन कुमारी, श्वेता कुमारी सहित पैनल अधिवक्ता पवन कुमार, बाल मुकुंद कुमार, कन्हैया कुमार, प्रियंका कुमारी, रिमझिम कुमारी और अन्य करीब 100 लोग उपस्थित रहे।

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