रिपॉर्ट
फूलदेव पटेल
मुजफ्फरपुर, 8 मार्च। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर जीविका दीदी न्याय चेतना अभियान, सड़क सुरक्षा, मार्ग विकास तथा 100 दिवसीय बाल विवाह जागरूकता अभियान के समापन के उपलक्ष्य में राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (नालसा) के निर्देश पर महिला कानून, पीएनडीटी एक्ट तथा घरेलू हिंसा के प्रति जागरूकता को लेकर सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य समाज में महिलाओं के अधिकारों, सुरक्षा और सशक्तिकरण के प्रति जागरूकता बढ़ाना था।
दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का उद्घाटन
कार्यक्रम का उद्घाटन प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सुश्री श्वेता कुमारी सिंह, परिवार न्यायाधीश श्री पीयूष प्रभाकर, जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रथम श्री राजा राम संतोष कुमार, जिला एवं सत्र न्यायाधीश द्वितीय सुश्री नयता सिंह, विशेष न्यायाधीश पॉक्सो-3 सुश्री नूर सुल्तान, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव सुश्री जय श्री कुमारी, न्यायाधीश श्री पंकज तिवारी, श्री भवेश चंद, श्री अजीत कुमार, श्री राज कपूर, जिलाधिकारी श्री सुब्रत कुमार सेन तथा वरीय पुलिस अधीक्षक श्री कांन्तेश कुमार ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया।
महिलाओं की समान भागीदारी जरूरी
इस अवसर पर प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सुश्री श्वेता कुमारी सिंह ने कहा कि महिलाओं की स्वतंत्रता, समानता और भागीदारी की मांग वर्ष 1911 से उठती रही है, लेकिन लगभग 115 वर्षों बाद भी समाज में महिलाओं को पूर्ण समानता नहीं मिल सकी है। उन्होंने कहा कि शिक्षा, स्वास्थ्य, राजनीति और अन्य क्षेत्रों में महिलाओं को बराबरी का अधिकार मिलना चाहिए। समाज को बेटा और बेटी को समान दृष्टि से देखना होगा। उन्होंने यह भी कहा कि महिला दिवस केवल एक दिन तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि हर दिन महिलाओं के सम्मान और जागरूकता के लिए प्रयास किए जाने चाहिए।
समाज की सोच में बदलाव आवश्यक
परिवार न्यायाधीश श्री पीयूष प्रभाकर ने कहा कि शिक्षा, राजनीति और नौकरियों में 50 प्रतिशत आरक्षण मिलने के बावजूद महिलाओं के प्रति समाज की सोच में अपेक्षित बदलाव नहीं आया है। यह समाज के लिए चिंतन का विषय है।
जीविका दीदी की भूमिका सराहनीय
जिलाधिकारी श्री सुब्रत कुमार सेन ने कार्यक्रम में उपस्थित सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि मुजफ्फरपुर जिले में लगभग 8 लाख जीविका दीदी स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से सरकार से ऋण प्राप्त कर अपने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत बना रही हैं, जो एक बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि पंचायती राज संस्थाओं में महिलाओं की भागीदारी लगातार बढ़ रही है। महिलाएँ मुखिया, सरपंच, वार्ड सदस्य, पंचायत समिति सदस्य और जिला परिषद के रूप में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं तथा अपनी बातों को निर्भीकता से रख रही हैं।


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