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कविता संग्रह: नारी, प्रकृति और एकता की स्वर-लहरियाँ

✨ यह संग्रह समाज की सच्चाई, प्रकृति की सुंदरता, एकता की शक्ति और सपनों की उड़ान को दर्शाता है।

नारी, प्रकृति और एकता पर आधारित हिंदी कविता संग्रह की फीचर इमेज
🔥 मिटाओ दहेज प्रथा
लेखिका: निर्मला (उम्र – 16, उत्तराखंड)


मिटाओ इस भ्रम को, मिटाओ इस प्रथा को,
जो लाचारी का फरमान है,
दहेज ही वो बुरी प्रथा है,
जो लेता बेटियों की जान है।
लालच का जो चश्मा लगाकर,
गुण उसे फिर नजर न आता,
दहेज कोई प्रथा नहीं, कलंक है,
ये समाज कब समझेगा?
इसमें बेटियों की खुशी नहीं होती,
मिटता उसका केवल अरमान है,
ये रीति-रिवाज नहीं, लोगों का भ्रम है।।

🐦 नन्हीं चिड़िया

🌿 लेखिका: महिमा सिंह (उत्तराखंड)नन्हीं सी वह चिड़िया है,


डाली पर वो बैठी रहती है,
हमको प्यारी सी लगती है,
नन्हीं सी वह चिड़िया है।

गाना अपना सुनाती है,
मीठी बोली दिल को छू जाती है,
उसका प्यार गाना सुनकर,
मोर भी नाचने लगते हैं।

नन्हीं सी वो प्यारी चिड़िया,
बहुत खुश हो जाती है,
उसकी प्यारी खुशी देखकर,
जंगल के फूल खिल जाते हैं।।

🤝 एकता में बल

🌄 लेखिका: लक्ष्मी आर्य (गरुड़, उत्तराखंड)साथ मिलकर कदम बढ़ाएं,

एकता में बोल फिर बढ़ाएं,
एक साथ रहती नींव हमारी,
हौसले से कदम सभी बढ़ाएं।

मिलकर जब हम साथ चलेंगे,
एकता में फिर बल बढ़ाएंगे,
हर पल हम बढ़ते जाएंगे,
फिर रोक न हमें कोई पाएंगे।

हर पल हम मिलकर संग रहेंगे,
फिर एकता में बल बढ़ाएंगे।।

एक लड़की का सपना

लेखिका: भूमिका (कक्षा 8, उत्तराखंड)


कोई कितने बड़े भी सपने क्यों न हों,
मेरे पूरे हों ये हर कोई सोचता है,
शायद लड़कियों के सपने नहीं होते हैं,
मगर मैं बताती हूं — मेरा एक छोटा सा सपना है।

कि मैं इंजीनियर बनूं और जग में नाम रौशन करूं,
इसको पूरा करने के लिए पूरा जी-जान लगाऊं,
और सपने पूरा करके सबको मैं दिखलाऊं,
फिर लड़कियों के लिए मैं एक मिसाल बन जाऊं।।

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