ज्वलंत मुद्दे

6/recent/ticker-posts

रमाशंकर गिरि का स्मृति दिवस मना

Report 

Phuldev Patel 

देश के प्रथम राष्ट्रपति और देशरत्न डॉ राजेंद्र प्रसाद, सम्पूर्ण क्रांति के प्रणेता लोकनायक जयप्रकाश नारायण व सामाजिक - सांस्कृतिक आंदोलन के जनंप्रहरी भोजपुरी के शेक्सपियर कहे जाने वाले भिखारी ठाकुर जी की पावन छपड़ा की भूमि को वंदन करते हुए हम आज छपड़ा के एक और महान सपूत, बिहार राज्य जनवादी सांस्कृतिक मोर्चा "विकल्प" के संस्थापक साथियों में एक कामरेड रमाशंकर गिरि जी की स्मृति दिवस पर, उन्हें याद करते हुए क्रांतिकारी सलाम पेश करता हूँ ।

रमाशंकर गिरि का स्मृति दिवस मना

कामरेड रमाशंकर गिरि जी का सम्पूर्ण जीवन, जनता और जनमानस के हित में समर्पित रहा है। उन्होंने जहाँ एक ओर शिक्षक के रूप में छात्र और विद्यालय हित में काम किया तो दूसरी ओर शिक्षकों के हित में भी सतत संघर्ष करते रहें। वे शिक्षक और शिक्षक युनियन को मजबूत करते हुए केवल शिक्षक अधिकार की ही लड़ाई नहीं लड़ी बल्कि शिक्षकीय कर्तव्यों को भी, अपने संघर्षो में भी उतनी ही प्रमुखता दी।

कामरेड रमाशंकर गिरि जी की कार्य दक्षता से स्पष्ट है कि वे देश की सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक समझ रखने में, उतने ही प्रवीण थे। उन्होंने शिक्षण कार्य करते हुए गांव - समाज में व्याप्त पाखंड, अंधविश्वास, कुप्रथा के खिलाफ समाज को वैज्ञानिक दृष्टि देने, सामाजिक समरसता स्थापित करने, दहेज प्रथा जैसे क्रूर प्रथा को दूर करने के लिए जन अभियान चलाया और लोगों में जागृति पैदा करने के लिए लोगों को गोलबंद करते रहें। राजनीतिक रुप से उनकी सजगता का अंदाजा हम आप भलीभांति लगा सकते हैं कि उन्होंने कैसे स्वतंत्रता संग्राम में अपनी जान की आहुति देने वाले वीर शहीद भगत सिंह, छठु गिरि, और उनके साथियों की मूर्ति अपने गांव में स्थापित कर लोगों में शहीदों के प्रति सम्मान का भाव पैदा किया था।

वे जनता की संस्कृति, जनवादी संस्कृति के पक्षधर रहें और उसे जन-जन तक पहुंचाने के लिए बिहार राज्य जनवादी सांस्कृतिक मोर्चा "विकल्प" जैसे सांस्कृतिक संगठनों की स्थापना कामरेड यादवचन्द्र, बी. प्रशांत और प्रोफेसर तैयब हुसैन जैसे महान संस्कृतिकर्मियों के साथ मिलकर की।इन विभूतियों की मेहनत और योगदान की बदौलत बिहार राज्य जनवादी सांस्कृतिक मोर्चा विकल्प, आज अखिल भारतीय जनवादी सांस्कृतिक - सामाजिक मोर्चा विकल्प के रूप में अपना परचम लहरा रहा है। 

आज जिस तरह से देश भर में जाति-धर्म का उन्माद फैलाया जा रहा है और पूंजीवादी शक्तियाँ देश के तमाम सरकारी संस्थानों को कब्जे में ले रही है, उसके खिलाफ हमें उसके खिलाफ कामरेड रमाशंकर गिरि के जन संघर्ष को आगे बढ़ाने के लिए आगे आना होगा। सचमुच यही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी। 


एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ