ज्वलंत मुद्दे

6/recent/ticker-posts

तालियों की गड़गड़ाहट से स्मृतियों के अंधेरे तक दर्शकों को भावुक कर गया ‘नट बख्खो’

मुजफ्फरपुर. जिला स्कूल मैदान में शुक्रवार को आकृति रंग संस्थान की ओर से पांच दिवसीय राष्ट्रीय नाट्य मेला का शुभारंभ हुआ. उद्घाटन वररीय शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ अरुण शाह, हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ प्रवीण चंद्रा, एसबीआई के पूर्व महाप्रबंधक अरुण कुमार, किलकारी की प्रमंडलीय समन्वयक पूनम कुमारी, नाट्य मेला के संयोजक डॉ संजय सुमन, जिला स्कूल के प्राचार्य जीबू झा, डॉ सुशांत कुमार, आकृति रंग संस्थान के अध्यक्ष अशोक अंदाज ने संयुक्त रूप से किया. संचालन सत्यम कुमार सिंह ने किया. मेला के संदर्भ में यशवंत पराशर ने जानकारी दी. महोत्सव से पहले रंगकर्मी रॉबिन रंगकर्मी और विजय मित्र को श्रद्धांजलि दी गयी. 

मुजफ्फरपुर के राष्ट्रीय नाट्य मेला में मंचित ‘नट बख्खो’ नाटक का भावनात्मक दृश्य, जिसमें कलाकार के जीवन के उतार-चढ़ाव को दर्शाया गया है।

पहले दिन आकृति रंग संस्थान नट बख्खों नाटक का मंचन किया. इस नाटक के माध्यम से कलाकारों ने मंच की चकाचौंध से स्मृतियों के अंधेरे तक के सफर को बखूबी दर्शाया़. सशक्त अभिनय और निर्देशन ने नाटक को एक ऊंचाई प्रदान की. इसका लेखन, परिकल्पना और निर्देशन डॉ सुनील फेकानिया ने किया था. 

"तालियों की गूंज थमते ही कलाकार जिस सन्नाटे में उतरता है, वही उसकी सबसे बड़ी त्रासदी होती है—क्योंकि मंच पर एक बार मरना आसान है, मगर जिंदगी में हर दिन थोड़ा-थोड़ा टूटना सबसे कठिन।"

नट बख्खो महज एक नाटक नहीं, बल्कि रंगमंच की उस क्रूर सच्चाई का दस्तावेज़ था, जहां तालियों की गड़गड़ाहट और सन्नाटे के बीच की दूरी बहुत कम होती है़ इस मार्मिक रंगकथा में कलाकार के वैभव और उसके पतन की ढलान को बड़ी संजीदगी से चित्रित किया गया. 

नाटक की धुरी दो चरित्रों के इर्द-गिर्द घूमती रही, एक प्रख्यात अभिनेता, जिसके इशारों पर कभी पूरा रंगमंच जीवंत हो उठता था, और दूसरा उसका वफादार प्रॉम्प्टर, जो पर्दे के पीछे से उसे शब्द उधार देता था. कहानी उस समय की थी, जब उम्र और विस्मृति ने अभिनेता के चमकते कॅरियर पर ग्रहण लगा दिया. नाटक के दृश्यों में कभी वैभव की पराकाष्ठा और उसके बाद का सन्नाटा बड़ी संजीदगी से प्रस्तुत किया गया.

ऊहापोह और मानवीय संवेदना का संघर्ष

'नट बख्खो' कलाकार के उस ऊहापोह को उकेरता है, जहां वह अपने अस्तित्व की तलाश में स्मृतियों से लड़ता है. वह 'प्रॉम्प्टर'' जो कभी उसे संवाद याद दिलाता था, अब उसे जीवन जीने का सहारा देने की कोशिश करता है, लेकिन अभिनेता का स्वाभिमान और उसकी टूटन उसे अंधेरी गलियों की ओर धकेलती है. वह कहता है, "मंच पर मरना आसान है, लेकिन मंच से उतरकर रोज थोड़ा-थोड़ा मरना सबसे बड़ी त्रासदी है." यह नाटक इसी त्रासदी को अपनी भाषा बनाता है. उसे अपनी पहचान एक बोझ लगने लगती है, तो वह कलाकार हार मान लेता है और जीवन के इस अभिनय को विराम दे देता है.

मुजफ्फरपुर के राष्ट्रीय नाट्य मेला में मंचित ‘नट बख्खो’ नाटक का भावनात्मक दृश्य, जिसमें कलाकार के जीवन के उतार-चढ़ाव को दर्शाया गया है।

फैज की नज्मों का चला जादू

प्रस्तुति की सबसे बड़ी विशेषता इसका संगीत और गीतों का चयन रहा. फ़ैज अहमद फ़ैज की कालजयी नज़्में जब गीतों के रूप में मंच पर गूंजती थी, तो व्ह केवल पृष्ठभूमि संगीत नहीं रह जातीं, बल्कि पात्रों की आत्मा की आवाज़ बन जाती हैं थी. "मुझसे पहली सी मोहब्बत मेरे महबूब न माँग" या "पास रहो कि बहुत रात जा चुकी है" जैसी पंक्तियां नाटक की भावनात्मक गहनता को उस ऊंचाई पर ले गयी. जहां दर्शक खुद को कलाकार के दुख से अलग नहीं कर पाता.

सुनील फेकानिया का निर्देशन दर्शकों को यह सोचने पर मजबूर किया कि क्या एक कलाकार की नियति केवल तालियां हैं या उस सन्नाटे की भी कोई जिम्मेदारी है, जो खेल खत्म होने के बाद पसर जाता है. 'नट बख्खो' एक ऐसी ही चीख है जो परदा गिरने के बाद भी कानो में गूंजती रहती है. नाटक में महताब की भूमिका में शेखर सुमन, निकेत की भूमिका में विवेक कुमार, खुशी की भूमिका में कृति भक्ता, तीन बेटियों की भूमिका में शीतल रानी, प्रतिभा रानी, मीनाक्षी, कोरस में ऋचा कुमारी, जीत वर्मन, संचय कुमार, मिहिर मनीष भारती, ऋत्विक वर्मन की भूमिका रही. संगीत ऋषिका पोद्दार, सौरभ आर्या सुमन व आदित्य सुमन का रहा. डॉ संतोष सारंग, विनय, प्रभात कुमार, वीरेन नंदा, यशवंत पराशर, नदीम खान, डॉ अविनाश कुमार, सुजीत कुमार, अशोक अंदाज, डॉ हेमनारायण विश्वकर्मा, कुंदन कुमार व मुकेश कुमार की भूमिका रही.

आज पेटिंग प्रदर्शनी का उद्घाटन और वर्कशॉप

नाट्य महोत्सव के दूसरे दिन शनिवार को पेटिंग प्रदर्शनी का शुभारंभ होगा. पद्मश्री निर्मला देवी, बीएचयू की विजुअल आर्ट की डीन उत्तमा दीक्षित, निर्देशक अभिषेक मुद्गल, विमल विश्वास संयुक्त रूप से उद्घाटन करेंगे़. इसके बाद निर्मला देवी पेटिंग और अभिनेता कुशाग्र नंदा थियेटर के छात्रों को अभिनय का गुर सिखाएंगे. इसके बाद एक्सपर्ट टॉक होगा. शाम में उदयपुर की रंगमस्ताने टीम महारथी नाटक का मंचन करेगी.

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ