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सरोजिनी नायडू की जयंती पर हुआ पुरखा पुरनिया संवाद

Phuldev Patel

मुजफ्फरपुर। ( 13 फरवरी) को मालीघाट में सरला श्रीवास सामाजिक सांस्कृतिक शोध संस्थान द्वारा 'भारत कोकिला' स्वतंत्रता सेनानी और कवयित्री सरोजिनी नायडू की जयंती पर  पुरखा पुरनिया संवाद का आयोजन हुआ। जिसकी अध्यक्षता लोक कलाकार सुनील कुमार ने की । अध्यक्षीय संबोधन में उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता सेनानी और कवयित्री सरोजिनी नायडू के जन्मदिन को राष्ट्रीय महिला दिवस के रूप में जाना जाता हैं। आज ही के दिन 13 फरवरी  स्वतंत्रता सेनानी और कवयित्री सरोजिनी नायडू का जन्म हुआ था। सरोजिनी नायडू स्वतंत्रता सेनानी होने के साथ ही स्त्रियों के अधिकारों के लिए संघर्ष करने वाली प्रमुख कार्यकर्ता थीं। उन्हें 'नाइटेंगल ऑफ इंडिया' और 'भारत कोकिला' के रूप में भी जाना जाता है।

सरोजिनी नायडू की जयंती पर हुआ पुरखा पुरनिया संवाद

परफेक्ट सॉल्यूशन सोसाइटी के सचिव अनिल कुमार ठाकुर ने कहा कि सरोजिनी नायडू को देश की पहली महिला राज्यपाल होने का गौरव भी हासिल है। सरोजिनी नायडू  12 साल की उम्र से ही कविताएं लिखनी शुरू कर दी थीं। शिक्षा हासिल करने के दौरान ही वे राष्ट्रीय आंदोलन से जुड़ गईं और उसमें सक्रिय रूप से भाग लिया। महात्मा गांधी, जवाहल लाल नेहरू समेत तमाम बड़े नेता उनकी नेतृत्व क्षमता के कायल थे और उनका बहुत सम्मान करते थे। सरोजिनी नायडू ने औरतों को शिक्षा दिलाने और समाज में उन्हें सम्मानजनक स्थान दिलाने के लिए काफी संघर्ष किया।

सरला श्रीवास युवा मंडल की अध्यक्ष सुमन कुमारी ने बताया कि सरोजिनी नायडू महिला अधिकारों की प्रबल समर्थक थीं। उन्होंने उनकी शिक्षा और समाज में उन्हें हर क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए काफी प्रोत्साहन दिया। सेवादार मंच के अध्यक्ष अविनाश कुमार ने कहा कि भारतीय महिला संघ और अखिल भारतीय महिला सम्मेलन ने साल 2014 से राष्ट्रीय महिला दिवस मनाने का निर्णय लिया। धन्यवाद ज्ञापन संरक्षक कांता देवी ने दिया।

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