Phuldev Patel
Muzaffarpur मालीघाट, 22 फरवरी 2026 (रविवार): मालीघाट चुन्नाभट्टी रोड स्थित यादवचन्द्र–शांति देवी ट्रस्ट के सभागार में महान रंगकर्मी, साहित्यिक यात्री, सफल संगठनकर्ता एवं शोषित-पीड़ित अवाम की मुखर आवाज कामरेड यादवचन्द्र की 19वीं स्मृति दिवस श्रद्धा और गरिमा के साथ मनाई गई। कार्यक्रम का आयोजन बिहार राज्य जनवादी सांस्कृतिक मोर्चा "विकल्प" एवं नवोदित इकाई के संयुक्त तत्वावधान में किया गया।
कार्यक्रम तीन सत्रों—विचार गोष्ठी, काव्य गोष्ठी और सांस्कृतिक संध्या—में संपन्न हुआ। शुरुआत "विकल्प" के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व कुलपति डॉ. रवीन्द्र कुमार ‘रवि’ तथा मालीघाट इकाई के अध्यक्ष अरुण कुमार वर्मा द्वारा कामरेड यादवचन्द्र के चित्र पर माल्यार्पण एवं पुष्पांजलि अर्पित कर की गई।
विचार गोष्ठी में व्यक्तित्व और कृतित्व पर प्रकाश
प्रथम सत्र विचार गोष्ठी का उद्घाटन करते हुए डॉ. रवीन्द्र कुमार ‘रवि’ ने कहा कि यादवचन्द्र का व्यक्तित्व और कृतित्व एक मशाल की तरह है, जो समाज को शोषण और अन्याय के खिलाफ संघर्ष की प्रेरणा देता है। उन्होंने यादवचन्द्र की चर्चित कृतियों ‘परम्परा और विद्रोह’, ‘एक किस्त पराजय’ और ‘खौल रही फल्गु’ को सामाजिक परिवर्तन का दर्पण बताया।
हिन्दी के प्राध्यापक मनोज कुमार ने कहा कि यादवचन्द्र का जीवन पूर्णतः समाज को समर्पित था। उनके जीवन और लेखन में कोई अंतर नहीं था। वरिष्ठ रंगकर्मी कामेश्वर प्रसाद ‘दिनेश’ ने बताया कि यादवचन्द्र एक मंजे हुए रंगकर्मी थे, जिनका मंच पर उतरना ही दर्शकों में कौतूहल जगा देता था। उन्होंने मुंशी प्रेमचंद की प्रसिद्ध कहानियों ‘कफन’, ‘सवा सेर गेहूँ’ और ‘पूस की रात’ का सफल नाट्य रूपांतरण कर रंगमंच को समृद्ध किया।
युवा रंगकर्मी धीरेन्द्र धीरु ने उन्हें कुशल शिक्षक बताते हुए कहा कि उनकी शिक्षण शैली सरल, सहज और प्रभावशाली थी। अध्यक्षीय संबोधन में अरुण कुमार वर्मा ने यादवचन्द्र को महान व्यक्तित्व बताते हुए कहा कि वे स्वतंत्रता संग्राम के बाल क्रांतिकारी रहे तथा जनकवि नागार्जुन के सहचर भी रहे।
इस अवसर पर नंद किशोर नंदन द्वारा लिखित आलेख का पाठ किया गया। विचार रखने वालों में नीरज प्रकाश, अली अहमद मंजर, प्रमोद आजाद, दिवाकर घोष, अवधेश कुमार एवं बाबू लाल सहनी प्रमुख रहे।
काव्य गोष्ठी में रचनाओं की प्रस्तुति
द्वितीय सत्र काव्य गोष्ठी की अध्यक्षता एवं मंच संचालन वरिष्ठ कवि कुमार विरल ने किया। इस सत्र में नीरज, विभाकर विमल, उमेश राज, दिवाकर घोष, प्रो. मनोज, महफूज अहमद आरिफ, अंजनी कुमार पाठक, अंशु कुमार, मो. एहसान, अभय कुमार शब्द, धीरेन्द्र धीरु, पूजा कुमारी, अमन और राजू सहित अनेक कवियों ने अपनी रचनाएँ प्रस्तुत कीं।
सांस्कृतिक संध्या में जनगीत और नाटक की प्रस्तुति
कार्यक्रम के तृतीय सत्र में जागृति बैरिया, सरला श्रीवास सांस्कृतिक सामाजिक संगठन के संस्थापक सुनील कुमार एवं नवोदित इकाई की टीम ने जनगीत प्रस्तुत किए, जिन्हें उपस्थित दर्शकों ने उत्साहपूर्वक सराहा। साहेबगंज (राजवाड़ा हालिमपुर) इकाई की टीम ने नाटक ‘सबसे सस्ता गोश्त’ की प्रभावशाली प्रस्तुति देकर खूब वाहवाही बटोरी।
कार्यक्रम में बेबी सिंह, रंजना सिंह, सोहन कुमार, प्रियांशु कुमार, सरिता आनंद, मोहन बैठा, सोनू सरकार, अरविन्द कुमार, नारायण कुमार, प्रो. कृष्णनंदन सिंह, रत्नेश प्रकाश, सौरभ कुमार, रौशन, आदित्य, पूनम कुमारी, आनंद कुमार सहित बड़ी संख्या में गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
अंत में मालीघाट इकाई की सचिव पूजा ने धन्यवाद ज्ञापन किया। कार्यक्रम ने यादवचन्द्र के विचारों और संघर्षशील जीवन को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का संकल्प दोहराया।

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