एक ने व्यवस्था को आईना दिखाया, दूसरी ने साहस को आवाज दी, एक ओर कर्ण का दर्द, दूसरी ओर तेतू का संघर्ष—दर्शकों की आंखें और सोच दोनों नम कर गया मंच
- पद्मश्री निर्मला देवी ने पेंटिंग प्रदर्शनी का उद्घाटन किया
मुजफ्फरपुर: आकृति रंग संस्थान की ओर से जिला स्कूल मैदान में आयोजित पांच दिवसीय राष्ट्रीय नाट्य महोत्सव के दूसरे दिन शनिवार को दो सशक्त नाटकों का मंचन किया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन उपमेयर डॉ. मोनालिसा, डॉ. नवीन कुमार, बीआरए बिहार विश्वविद्यालय के लाइब्रेरियन डॉ. कौशल किशोर चौधरी, यूरोलॉजिस्ट डॉ. कुमार विक्रम, स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. पल्लवी महाजन, रामेश्वर सिंह कॉलेज के सहायक प्राध्यापक डॉ. गोवर्धन, अशोक अंदाज और मुकेश कुमार ने संयुक्त रूप से किया।
उदयपुर से आई रंगमस्ताने टीम ने विष्णु विभांशु वैभव द्वारा लिखित नाटक ‘महारथी’ का मंचन किया। महाभारत के पात्र कर्ण के जीवन पर आधारित इस नाटक ने पौराणिक कथा के साथ-साथ आधुनिक समाज में व्याप्त जाति और कुल आधारित भेदभाव को भी उजागर किया। मंच पर कर्ण के संघर्ष, आत्मसम्मान और सामाजिक असमानता के खिलाफ उनकी जंग को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया।
नाटक में दिखाया गया कि जब सभा में कर्ण का अपमान हो रहा था, तब दुर्योधन ने उसे सहारा देते हुए अंगदेश का राजा घोषित किया। इसके बावजूद कर्ण को सामाजिक उपेक्षा और नैतिक द्वंद्व का सामना करना पड़ा। निर्देशक अभिषेक मुद्गल ने इस प्रस्तुति के माध्यम से यह संदेश दिया कि ‘महारथी’ केवल एक वीरगाथा नहीं, बल्कि समानता और मानवीय गरिमा के लिए जारी संघर्ष की कहानी है। कलाकारों के सशक्त अभिनय और ओजपूर्ण संवादों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
दूसरी प्रस्तुति में किलकारी के बाल कलाकारों ने पद्मश्री एच. कन्हाईलाल के नाटक ‘पेबेट’ के हिंदी रूपांतरण ‘तेतू’ को मंच पर जीवंत किया। मणिपुरी लोककथा पर आधारित इस नाटक में ‘मां तेतू’ और उसके सात बच्चों के प्रेम, संघर्ष और साहस की कहानी दिखाई गई। लोक संगीत और पारंपरिक वेशभूषा के साथ प्रस्तुति ने दर्शकों को मणिपुर की संस्कृति से जोड़ दिया।
नाटक के चरमोत्कर्ष में मां तेतू अपनी सूझबूझ, साहस और एकता के बल पर अपने बच्चों को मुक्त कराती है। बाल कलाकारों के जीवंत अभिनय और प्रतीकात्मक दृश्यों ने मातृत्व की शक्ति को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया। निर्देशक राजू सहनी के निर्देशन में यह प्रस्तुति दर्शकों को अंत तक बांधे रखने में सफल रही।
इसी अवसर पर पद्मश्री निर्मला देवी ने पेंटिंग प्रदर्शनी का उद्घाटन किया। उनके साथ बीएचयू की विजुअल आर्ट की डीन प्रो. उत्तमा दीक्षित और विमल विश्वास भी मौजूद रहे। प्रदर्शनी के बाद पेंटिंग और थियेटर कार्यशाला का आयोजन किया गया, जिसमें छात्रों ने लाइव पेंटिंग का प्रदर्शन किया। अभिनेत्री कुशाग्र नंदा ने प्रतिभागियों को अभिनय के गुर सिखाए।
प्रो. उत्तमा दीक्षित ने कहा कि हर क्षेत्र की अपनी विशिष्ट कला होती है और मुजफ्फरपुर में बोली जाने वाली बज्जिका भाषा से जुड़ी कला को बढ़ावा देना चाहिए। उन्होंने जोर दिया कि स्थानीय कलाकार यदि अपनी माटी की कला को आगे बढ़ाएंगे, तो इससे क्षेत्र की पहचान राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित होगी।


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