बेटी को आगे बढ़ाओ
गुड़िया कपकोटी
कपकोट, उत्तराखंड
बेटी बचाओ, बेटी को पढ़ाओ,
बेटी को तुम आगे बढ़ाओ,
बेटी को कमजोर न समझो,
उस पर कोई अत्याचार न करो,
वो माँ है, किसी की बहन है,
किसी की लाडली बेटी है वो,
उस पर कभी दबाव न डालो,
न अत्याचार कर उसे रुलाओ,
उसके मन को कभी न दुखाना,
उसके दुखों को न अनदेखा करना,
समाज के सारे दुख सहती है वो,
फिर भी हँसकर जीती है वो,
हर काम के लिए उसे मत डांटो,
उसके सपनों को कभी मत टालो,
क्यों होता है ये सब लड़की के साथ,
क्यों करता समाज अन्याय उसके साथ?
अगर बेटी को तुम रुलाओगे,
फिर जीवन भर पछताओगे,
बेटी को तुम सम्मान दिलाओ,
उसे दुनिया में आगे बढ़ाओ।।
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सुंदर सी मेरी माँ
तनुजा
उम्र- 18 वर्ष
गरुड़, उत्तराखंड
माँ मेरी अच्छी है।
माँ मेरी सच्ची है।
वो करती मुझे प्यार,
मीठा हरदम बोलती है,
साथ में खेलती माँ मेरी,
कहानियाँ कहती माँ मेरी,
कभी ना वो मुझे डाँटती,
इतनी प्यारी है माँ मेरी,
फूलों से सुंदर माँ मेरी,
चंदा सी शीतल माँ मेरी,
मेरी दोस्त मेरी प्यारी माँ।।
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मेरा बचपन मेरा गांव
किरण बिष्ट
सुराग, उत्तराखंड
मेरा गाँव, बचपन की वह मीठी यादें हैं,
जहाँ मेरा हँसता-खेलता बचपन बीता,
वहीं मेरी सारी यादें गुज़रीं हैं,
वहीं मैं पली-बढ़ी, सपनों को जिया,
जहाँ मेरा पूरा परिवार रहता था,
दादा-दादी और भाई-बहनों का साथ था,
उनके संग ही खेलती और कूदती थी मैं,
हर दिन जैसे मेरे लिए कोई त्यौहार था,
पता ही नहीं चला कब गुज़र गया बचपन,
कब बीत गया वह सुनहरा समय,
जाने कब आ गईं मुझ पर जिम्मेदारियाँ,
कब आ बैठी मेरे कंधों पर अचानक,
जब उस छोटे से बचपन में थी मैं,
सिर्फ़ खेलना-कूदना ही काम था,
न कोई चिंता थी, न कोई बोझ था,
हर दिन बस खुशियों का नाम था,
अब देखो, सारे दिन करती हूँ काम,
जिम्मेदारियों में खुद को ढूँढती हूँ,
फिर से यादों का बचपन मुस्काता है,
मेरा गाँव आज भी मुझे बुलाता है।।
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मेरी दिशा सभा
गुंजन परिहार
कक्षा 6
जखेड़ा, उत्तराखंड
मेरी दिशा सभा है कितनी प्यारी,
रहता है मुझे हर रविवार इंतजार इसका,
जिसमें करते हैं हम ढेर सारी मस्ती,
होती प्यारी सी एक दिशा दीदी,
दिशा दीदी नई दिशा दिखाती,
वो वर्कशॉप में जो सीख कर आती,
ढेर सारे खेल वह सब हमें सिखाती,
हंसते हैं और मन की बातें कहते हैं हम,
नाचते गाते और यहां खुश रहते हैं हम।।

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