आज घर की माली हालत सुधारने के लिए राजस्थान समेत देश के विभिन्न राज्यों की महिला खेतीबारी को आजीविका का साधन बना रही हैं। साग-सब्ज़ी की जैविक खेती करके पर्यावरण के साथ -साथ मिट्टी की उर्वरा शक्ति को भी मज़बूत करने में बेजोड़ मिसाल पेश कर रही हैं। आइए जानते हैं ताकु देवी की कहानी जो जैविक पोषण वाटिका के जरिए आमदनी बढ़ा रही हैं---
ताकु
देवी लालू निनामा ग्राम – कड़वा अमरी तहसील घाटोल –जिला - बांसवाडाइन के पास
4 बीघा वर्षा आधारित खेती है। घर में 3 लोग परिवार के साथ रह रहे है।
अपने भरण-पोषण के लिए आजीविका के लिए ताकु देवी खेती करती है। पर वह जानती
है कि खेती में लागत खर्च ज्यादा होने से मुनाफा नहीं मिल रहा और परिवार
में पोषण की कमी भी ताकु देवी को महसूस होने लगी। ताकु देवी के पास 2 भैस ,
2 गाय है इसी से उनकी आजीविका चलती है।
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| ताकु देवी अपने जैविक पोषण वाटिका में |
ताकु देवी विभिन्न प्रयास , विभन्न विकल्पों को वह खोजती रही परन्तु कोई उचित उपाय नहीं मिल
रहा था वे कहती हैं कि हम बाजार में जाते थे, तो हमें ऐसी सब्जियां मिलती हैं जिसमें
रसायन डाला जाता है। फिर हमने सोचा क्यों न हम अपनी बाड़ी में ही जैविक
सब्जियों की खेती करें ऐसा मन में बहुत दिनों से विचार चल रहा था।
ऐसे में
मैं वाग्धारा संस्था गठित महिला सक्षम समूह में शामिल हो गई और मुझे
वाग्धारा के विविध परियोजना के तहत जो गतिविधियाँ होती है उसमे शामिल
होने लगी। सक्षम समूह यह एक ऐसा समूह है कि सच्ची खेती के माध्यम से
उत्पादन में वृद्धि कैसे करनी है यह सब समय-समय पर वाग्धारा के प्रशिक्षण
में मुझे जानकारी मिलती है और मैंने मन में ठान ली कि जो अभी खेती कर रही हूँ इनमे खाद , कीटनाशक इसका ज्यादा से ज्यादा उपयोग करके जमीन बंजर बन गई
है और इसका दुष्परिणाम हमारे स्वास्थ्य पर पढ़ रहा है।
उधर, बाजार हमारे ऊपर
हावी हो रहा है। सक्षम समूह के मासिक बैठक में मुझे जैविक खेती के बारे
में और खेती कम खर्च में अधिक उत्पादन मिले ऐसी तकनीकी ज्ञान महिला सक्षम
समूह के माध्यम से वाग्धारा के प्रशिक्षण से प्राप्त हुआ। मैंने जैविक
पोषण वाटिका वाग्धारा के मध्यम से घर में लगाई।
लॉकडाउन
के दरम्यान सब रोजगार-धंधे ठप्प पड़े रहे हैं। इसी दौरान ताकु देवी ने
वाग्धारा संस्था की महिला सक्षम समूह द्वारा दी गई सब्जी बीज किट को अपनी
उपलब्ध बाड़ी में कई तरह के सब्जी टमाटर, बेंगान, तुरई, गिलकी, टिंडी ,
मिर्ची, ग्वार फली, लौकी, पालक –मैथी धनिया, और प्याज आदि की 1010 वर्गफुट
में लगवाकर मेरे परिवार को पूरा पोषण मिले यह सुनिश्चित करके मैंने मार्च
2020 से जून 2020 तक 40000/- रुपए की आमदनी हुई।
यह पोषण वाटिका मैने 3
टाली (3000 किलो) गोबर खाद डालकर प्याज की खेती की इसमें 3 क्विंटल प्याज
की पैदावार की। इसमें से 50 किलो प्याज घर में खाने के लिए रखकर शेष 2.5
क्विंटल प्याज को 25/- रूपये प्रतिकीलो के भाव से बेचकर 6250/- रूपये की
आमदनी हुई। अपने जैविक पोषण वाटिका के निम्बू 15 किलो बेचकर 1500/- रुपए
आमदनी हुई और मेरे भेंस के दूध से 10 किलो घी बनाकर 800/- रुपए
प्रतिकिलो के भाव से बेचाकर 8000/- रुपए की आमदनी की। इस
आमदनी से मेरे परिवार की आजीविका बढ़ने में काफी मदद हुई। इन सबके लिए
वाग्धारा संस्था की सक्षम महिलाओं का पूरा सहयोग रहा। इसके लिए वाग्धारा
संस्था का आभार।



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