- बिहार विधान परिषद के उप भवन सभागार में आयोजित संगोष्ठी में 'अप्पन समाचार' पुस्तक का हुआ लोकार्पण
- मीडिया के क्षेत्र में बेहतर कार्यों के लिए गांव की बेटियां की गईं सम्मानित
पटना। वैकल्पिक मीडिया और तमाम सामाजिक क्रांति का दस्तावेजीकरण होना आवश्यक है। हिंदी मीडिया को मुख्यधारा की मीडिया कहने से पहले यह देखना जरूरी है कि क्या वह अपने लोकतांत्रिक व सामाजिक दायित्वों का निर्वहन कर रहा है? क्योंकि लोकतंत्र का चौथा स्तंभ आर्टिकल 19 में परिभाषित किया गया है, जो अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार है।
ये बातें हिंदी के वरिष्ठ पत्रकार, लेखक व चिंतक अनिल चमड़िया ने कहीं। एएस फाउंडेशन मुजफ्फरपुर द्वारा आयोजित 'अप्पन समाचार' पुस्तक का विमोचन सह परिचर्चा कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रो. (डाॅ) संजय कुमार सुमन ने की। मंच संचालन डाॅ सुशांत कुमार, जबकि धन्यवाद ज्ञापन अमृतांज इंदीवर ने किया। बिहार विधान परिषद सभागार में आयोजित इस संगोष्ठी में 'अप्पन समाचार' पुस्तक का लोकार्पण पूर्व राज्यसभा सदस्य अली अनवर, वरिष्ठ पत्रकार अनिल चमड़िया, हेमंत कुमार, साइंस कॉलेज पटना की प्राचार्या प्रो. अलका यादव, सीनेटर प्रो. (डॉ) संजय कुमार सुमन और अप्पन समाचार के सूत्रधार संतोष सारंग ने समवेत रूप से किया।
इस मौके पर अप्पन समाचार की रिपोर्टिंग टीम की कम्युनिटी रिपोर्टर सिमरन सहनी, अनिता कुमारी, काजल कुमारी, नेहा कुमारी, प्रियंका कुमारी, गुड़िया कुमारी, रिंकल कुमारी, रिमझिम कुमारी, प्रियंका कुमारी, वंदना कुमारी और नैना सुहानी को सम्मानित किया गया। आज से लगभग दो दशक पूर्व कस्बे में की गई उनकी पत्रकारिता को सभी वक्ताओं ने सराहना की।
मीडिया में हाशिये की बेटियों को आगे लाना अनुकरणीय पहल : पूर्व सांसद
पूर्व राज्यसभा सदस्य, वरिष्ठ पत्रकार व लेखक अली अनवर ने कहा कि संतोष सारंग ने मीडिया में हाशिये की बेटियों को आगे लाकर एक अनुकरणीय पहल की है। यह महत्वपूर्ण बात है कि सुदूर गांव से अभिवंचित समाज के अंदर से ये बेटियां उभरी हैं, जो मीडिया की व्यापक गहराई को इंगित करता है।
वरिष्ठ कथाकार संतोष दीक्षित ने कहा कि आज की मीडिया कुछ ज्यादा ही सत्ता की मुखापेक्षी होकर रह गई है, जबकि मीडिया का काम सूचना देना और वाॅच डॉग की भूमिका निभाना है।
अभिवंचित वर्ग की बेटियां पत्रकारिता के क्षेत्र में नजीर पेश की है : अलका
पटना साइंस कॉलेज की प्रिंसिपल प्रो. अलका कुमारी ने कहा कि आज का दिन खास दिन है। आज से दो दशक पहले हमारे अभिवंचित वर्ग की बेटियों ने सामुदायिक पत्रकारिता के क्षेत्र में जो काम किया, आज उनकी उपलब्धियां पूरे समाज के लिए नजीर पेश करने वाली है।
पत्रकार हेमंत कुमार ने कहा कि आज मुख्यधारा की मीडिया जनता के साथ नहीं खड़ी है। ऐसे में सोशल मीडिया ही वह प्लेटफ़ार्म है, जो जनता के सवालों को उसकी समग्रता में सामने लाने का काम कर रहा है।
कार्यक्रम के अपने अध्यक्षीय भाषण में प्रोफेसर (डॉ) संजय कुमार सुमन ने कहा कि अप्पन समाचार समाज और सत्ता के घातक प्रश्नों के खिलाफ आवाज उठाने की एक सशक्त आवाज का खूबसूरत डॉक्यूमेंटेशन है। उन्होंने कहा कि जातियों में बंटे भारतीय समाज में जबतक जातियों के अंदर का श्रेष्ठता बोध खत्म नहीं होगा, समाज का भला होने वाला नहीं है। अप्पन समाचार के संस्थापक संतोष सारंग ने अप्पन समाचार के पूरे कांसेप्ट को लेकर विस्तार से अपनी बात कही। उन्होंने कहा कि मुख्यधारा की मीडिया में गांव-जवार और जनता के मुद्दे की उपस्थिति बहुत कम है। हमने आज से दो दशक पहले अप्पन समाचार के माध्यम से मुजफ्फरपुर से जो प्रयोग किया था, उसका गहरा असर समाज में देखा गया।
इस मौके पर स्त्रीकाल के संपादक संजीव चंदन, कवि व लेखक मुसाफिर बैठा, युवा कवि अरविंद पासवान, अरुण नारायण, आरएन काॅलेज में हिंदी की सहायक प्राध्यापक डॉ सोनल, डॉ रिंकु कुमारी, वरिष्ठ पत्रकार प्रभात कुमार, सामाजिक कार्यकर्ता भीष्म कुमार, डॉ हेमनारायण विश्वकर्मा, भूपाल भारती, डॉ अविनाश कुमार, सिद्धांत सारंग, शत्रुघ्न साहू, फुलदेव पटेल, अजय शर्मा, राकेश साहू, पंकज सिंह, सूर्यकला भारती, प्रतिमा कुमारी समेत दर्जनों प्रोफेसर व प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे।





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