हक की लड़ाई
आँचल
कक्षा 10
सिमतोला, उत्तराखंड
मेरा हक़ है, मैं लेकर रहूँगी,
ज़िंदगी अपनी खुलकर जिऊंगी,
सपने मेरे, अधिकार भी मेरे,
राह बनाऊँगी, चाहे हों अँधेरे।
उम्मीद नई है, हौसला जवाँ है,
मुझमें समाज बदलने का अरमान है।
न रुकूँगी, न हार मानूँगी,
हर मुश्किल को पार कर जाऊँगी।
पढ़ूँगी, लिखूँगी, आगे बढ़ूँगी,
अपने हक की लड़ाई लड़ती रहूँगी।
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लड़की है तो कल है
गीता
कुलबान, उत्तराखंड
हम लड़कियां कमजोर नहीं, किसी से कम नहीं,
हमारे सपनों की उड़ान की कोई सीमा नहीं।
हमें भी आसमान में पंख फैलाने हैं,
अपनी मेहनत से नए मुकाम पाने हैं।
हमें भी पढ़ना है, आगे बढ़ना है,
अपने पैरों पर खड़े होकर जीना है।
अब अपनी आवाज बुलंद करेंगे,
अपने सपनों को सच करके दिखाएँगे।
लड़की हूँ, बोझ नहीं, मुझे भी सम्मान चाहिए,
बराबरी का हक़ और सारा आसमान चाहिए।
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मैं लड़की हूँ, मेरी भी एक कहानी है
योगिता
कक्षा 11
उत्तरोड़ा, उत्तराखंड
मैं लड़की हूँ, मेरी भी एक कहानी है,
आँखों में सपने, दिल में जवानी है।
जन्म लिया तो सवाल उठे, खुशियाँ क्यों कम हो गईं?
बेटा होता तो दीप जलते, मेरे हिस्से उदासी क्यों आई?
कभी घर की इज़्ज़त, कभी पराया धन कहलाती हूँ,
अपने ही सपनों पर पहरे देख घबराती हूँ।
क्यों मेरे कदमों पर इतनी पाबंदी है,
क्यों मेरी उड़ान पर दुनिया की निगरानी है?
मैं भी पढ़ूँगी, आगे बढ़कर अपनी पहचान बनाऊंगी,
अपने पैरों पर खड़ी होकर माँ-बाप का नाम रोशन करूँगी।
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मेरे सपनों की उड़ान
रोजी
डनेरा, उत्तराखंड
अपने सपनों को मंज़िल तक पहुँचाऊँगी,
अपनी मेहनत से नई राह बनाऊँगी।
हौसला बुलंद, इरादे मजबूत रखूँगी,
हर मुश्किल को पार करके आगे बढ़ूँगी।
भाई-बहनों का प्यार मेरा साहस बनेगा,
मेरे सपनों को भी एक नया आसमान मिलेगा।
न कोई लड़की डरेगी, न कोई औरत झुकेगी,
मिलकर चलेंगी तो हर मुश्किल मिटेगी।
अपने हक़ और मंज़िल के लिए कदम बढ़ाएंगे,
मेहनत और हिम्मत से नई दुनिया बनाएँगे।

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